लखनऊ में पर्यटन विभाग द्वारा योग, ध्यान और ज्ञान के आदिगुरु नीलकंठ महादेव को समर्पित विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कैलाश मानसरोवर यात्रा पूर्ण करने वाले ५५५ श्रद्धालुओं को एक-एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की। यह राशि विशेष कार्यक्रम के दौरान सीधे श्रद्धालुओं के बैंक खातों में भेजी गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राचीन काल से तीर्थयात्रा भारतीय जीवन परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। तीर्थाटन केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि यह समाज की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना को भी सशक्त बनाता है। उन्होंने कहा कि कठिन यात्राएं व्यक्ति को मानसिक दृढ़ता, अनुशासन और श्रद्धा का अनुभव कराती हैं।
कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील तिब्बत के ऊँचे पठारी क्षेत्र में स्थित हैं और अनेक धर्मों के लोगों के लिए अत्यंत पवित्र माने जाते हैं। कैलाश पर्वत को भगवान शिव का निवास माना जाता है। इसकी ऊँचाई लगभग ६६३८ मीटर है और यह क्षेत्र अत्यधिक दुर्गम परिस्थितियों के कारण विशेष तैयारी की मांग करता है।
कैलाश मानसरोवर यात्रा अत्यंत कठिन और खर्चीली मानी जाती है। इस यात्रा में प्रति व्यक्ति लगभग एक लाख चौहत्तर हजार रुपये से लेकर तीन लाख रुपये या उससे अधिक तक का व्यय आता है। पूरी यात्रा सामान्यतः पंद्रह से इक्कीस दिनों तक चलती है, जिसमें लगभग तिरेपन किलोमीटर की पैदल परिक्रमा भी शामिल होती है। यह परिक्रमा पाँच हजार छह सौ मीटर से अधिक ऊँचाई पर की जाती है, जिससे यात्रा शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण बन जाती है।
राज्य सरकार की यह सहायता केवल प्रदेश के स्थायी निवासियों को यात्रा पूर्ण करने के बाद दी जाती है। इसके लिए श्रद्धालुओं को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन करना होता है। इस पहल का उद्देश्य कठिन और महंगी तीर्थयात्रा को श्रद्धालुओं के लिए सुगम बनाना तथा अधिक लोगों को इस आध्यात्मिक यात्रा के लिए प्रेरित करना है। राज्य सरकार इसे श्रद्धालुओं के हित में एक महत्वपूर्ण सहयोग मान रही है।
