धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र की पावन धरती पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में मध्यप्रदेश की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक झलक दिखाई दी। संस्कृति, पर्यटन और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने महोत्सव के मुख्य मंच से बोलते हुए श्रीमद्भगवद्गीता को पूरी मानव जाति के लिए सबसे बेहतरीन ग्रंथ बताया और कहा कि यह जीवन दर्शन का आधार है।
श्री लोधी ने गीता के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि कुरुक्षेत्र वह पवित्र भूमि है जहाँ भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन के मन में चल रहे द्वंद्व को ज्ञान की रोशनी से दूर किया था। उन्होंने जीवन को एक महायुद्ध बताते हुए कहा कि यह धर्म और अधर्म, कर्तव्य और मोह के बीच का संघर्ष है। गीता हमें सिखाती है कि कैसे इन मुश्किलों में भी अपने मन को शांत और स्थिर रखना है। यही ‘स्थितप्रज्ञता’ है, और यही मनुष्य का सबसे बड़ा लक्ष्य होना चाहिए।
राज्य मंत्री ने कहा कि जीवन में समस्याओं से ज्यादा जरूरी है उन्हें हल करने के तरीके ढूंढना। जब हम यह तय नहीं कर पाते कि क्या करना सही है और क्या गलत, तब गीता ही हमें रास्ता दिखाती है। उन्होंने ‘कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन’ श्लोक का उदाहरण देते हुए कहा कि बिना किसी फल की इच्छा के कर्म करना ही मोक्ष और परमगति का मार्ग है।
श्री लोधी ने कुरुक्षेत्र में भीष्म पितामह द्वारा दिए गए ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ के मंत्र को याद करते हुए कहा कि आज प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी उसी भावना के साथ ‘राष्ट्र प्रथम’ की नीति पर काम कर रहे हैं और भारत को दुनिया में मजबूत बना रहे हैं। उन्होंने मध्यप्रदेश का जिक्र करते हुए कहा कि वे अतुल्य भारत के ‘हृदय-प्रदेश’ से आते हैं और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में धर्म, दर्शन और संस्कृति के नए आयाम स्थापित किए जा रहे हैं।
राज्यमंत्री श्री लोधी ने वहाँ मौजूद सभी लोगों को एक पवित्र संकल्प दिलाया। उन्होंने कहा कि समय और परिस्थितियाँ बदलती रहती हैं, लेकिन गीता का संदेश ‘धर्मो रक्षति रक्षितः’ हमेशा अटल रहता है। उन्होंने सभी से सत्य को अपनी भाषा, करुणा को अपना व्यवहार और कर्तव्य को अपना धर्म बनाने का आह्वान किया।
इस मौके पर पूज्य स्वामी रामभद्राचार्य जी, आचार्य प्रमोद कृष्णन, स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज और कई अन्य संत और श्रद्धालु मौजूद थे।
