लोकसभा में चुनाव सुधारों पर चर्चा एक बार फिर शुरू हो गई है। इस बहस में हिस्सा लेते हुए कांग्रेस नेता के. सी. वेणुगोपाल ने कहा कि मतदान का अधिकार लोकतंत्र का सबसे बुनियादी सिद्धांत है और इस अधिकार की रक्षा करना सरकार तथा संस्थाओं की जिम्मेदारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग धीरे-धीरे पक्षपाती होता जा रहा है, जिससे आम मतदाताओं का भरोसा कमजोर पड़ सकता है।
वेणुगोपाल ने यह भी आरोप लगाया कि 2024 लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस पार्टी के अकाउंट्स को आयकर रिटर्न दाखिल करने में देरी का हवाला देते हुए फ्रीज़ कर दिया गया था। उन्होंने बिहार में मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के मुद्दे को भी गंभीर चिंता बताते हुए कहा कि यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर नकारात्मक असर डालता है।
बहस में हिस्सा लेते हुए भाजपा नेता रवि शंकर प्रसाद ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जब भी विपक्ष चुनाव हारता है, तो वह चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाना शुरू कर देता है। उन्होंने कहा कि बिहार में कांग्रेस ने कई रैलियाँ कीं और SIR की आलोचना भी की, लेकिन इसके बावजूद पार्टी को विधानसभा चुनावों में बहुत कम सीटें मिलीं। उन्होंने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों को introspection करने की सलाह दी और कहा कि वे चुनाव आयोग पर दोष मढ़ने के बजाय अपनी रणनीति पर ध्यान दें।
ट्रिणमूल कांग्रेस की सांसद शताब्दी रॉय ने SIR को जनता को परेशान करने वाला और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में इस प्रक्रिया के दौरान BLO कर्मचारियों की जान तक जा रही है, जो बेहद दुखद और चिंताजनक है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर बांग्लादेशी और रोहिंग्या भारत में प्रवेश कर रहे हैं, तो इसकी जिम्मेदारी सरकार की नीतिगत असफलता पर जाती है।
समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने कहा कि चुनाव आयोग को पूरी तरह निष्पक्ष रहना चाहिए, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में ऐसा नहीं दिख रहा है। उनका आरोप था कि चुनाव आयोग सरकार के इशारों पर काम करता दिखाई दे रहा है।
इस मुद्दे पर चर्चा की शुरुआत कल कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने की थी। चुनाव सुधारों को लेकर जारी इस बहस ने एक बार फिर भारतीय लोकतंत्र में चुनावी प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
