यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन के शोधकर्ताओं ने एक क्रांतिकारी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिस्टम विकसित किया है जो मस्तिष्क के MRI स्कैन का विश्लेषण कर महज कुछ ही सेकंड में सटीक निदान कर सकता है। ‘नेचर बायोमेडिकल इंजीनियरिंग’ में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, ‘प्राइमा’ (Prima) नामक इस मॉडल ने न्यूरोलॉजिकल स्थितियों की पहचान करने में 97.5% तक की सटीकता दिखाई है। यह तकनीक न केवल बीमारी की पहचान करती है, बल्कि यह भी तय करने में सक्षम है कि किस मरीज को तत्काल चिकित्सा सहायता की आवश्यकता है। मिशिगन हेल्थ के न्यूरोसर्जन डॉ. टॉड हॉलॉन के अनुसार, दुनिया भर में MRI की बढ़ती मांग और चिकित्सकों पर बढ़ते दबाव को कम करने में यह AI मॉडल एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।
प्राइमा को एक ‘विज़न लैंग्वेज मॉडल’ (VLM) के रूप में तैयार किया गया है, जो रीयल-टाइम में इमेज, वीडियो और टेक्स्ट को एक साथ प्रोसेस कर सकता है। इसे प्रशिक्षित करने के लिए शोधकर्ताओं ने मिशिगन हेल्थ के डिजिटल रिकॉर्ड से 2 लाख से अधिक MRI अध्ययन और 56 लाख इमेजिंग सीक्वेंस का उपयोग किया है। यह सिस्टम किसी अनुभवी रेडियोलॉजिस्ट की तरह काम करता है, जो मरीज के मेडिकल इतिहास और इमेजिंग डेटा को जोड़कर स्वास्थ्य का पूर्ण विवरण तैयार करता है। परीक्षण के दौरान इसने 50 से अधिक विभिन्न रेडियोलॉजिक निदानों में अन्य उन्नत AI मॉडलों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया। विशेष रूप से स्ट्रोक और ब्रेन हेमरेज जैसी आपातकालीन स्थितियों में, यह सिस्टम तुरंत संबंधित विशेषज्ञों को अलर्ट भेजने में सक्षम है।
शोधकर्ताओं का मानना है कि यह तकनीक रेडियोलॉजी सेवाओं की कमी और परिणामों में होने वाली देरी की समस्या को हल कर सकती है, चाहे वह बड़े शहर का अस्पताल हो या संसाधनों की कमी वाला ग्रामीण इलाका। डॉ. हॉलॉन ने प्राइमा को “मेडिकल इमेजिंग का चैटजीपीटी” (ChatGPT for medical imaging) बताया है और संकेत दिया है कि भविष्य में इसी तरह की तकनीक का उपयोग मैमोग्राम, छाती के एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड के लिए भी किया जा सकता है। वर्तमान में यह तकनीक शुरुआती मूल्यांकन चरण में है और भविष्य के शोध में मरीज की इलेक्ट्रॉनिक मेडिकल रिकॉर्ड (EMR) जानकारी को शामिल कर इसकी सटीकता को और अधिक निखारने की योजना है।
साभार (Credit Line): यह लेख मिशिगन मेडिसिन – यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन द्वारा उपलब्ध कराई गई सामग्री और ‘नेचर बायोमेडिकल इंजीनियरिंग’ (Nature Biomedical Engineering) जर्नल में प्रकाशित शोध पत्र पर आधारित है।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह सामग्री केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार के विकल्प के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी चिकित्सीय स्थिति के संबंध में हमेशा अपने चिकित्सक या अन्य योग्य स्वास्थ्य प्रदाता की सलाह लें।
