अमेरिका की एक प्रमुख डाटा विश्लेषण संस्था द्वारा जारी ताज़ा वैश्विक सर्वेक्षण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक बार फिर दुनिया का सबसे लोकप्रिय नेता बताया गया है। सर्वेक्षण के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी को 68 प्रतिशत अनुमोदन प्राप्त हुआ है, जो अन्य विश्व नेताओं की तुलना में सबसे अधिक है। यह सर्वेक्षण 2 मार्च से 8 मार्च के बीच विभिन्न देशों के वयस्क नागरिकों की राय के आधार पर तैयार किया गया, जिसमें सात दिनों के औसत आंकड़ों को शामिल किया गया।
रिपोर्ट के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी ने लोकप्रियता के मामले में अन्य प्रमुख वैश्विक नेताओं पर स्पष्ट बढ़त बनाए रखी है। दूसरे स्थान पर गाइ पर्मेलिन और ली जे-म्युंग रहे, जिन्हें 62 प्रतिशत समर्थन मिला। इसके बाद Czech Republic के नेता को 57 प्रतिशत और जेवियर माइली को 56 प्रतिशत अनुमोदन प्राप्त हुआ।
सर्वेक्षण में यह भी सामने आया कि कई बड़े देशों के प्रमुख नेताओं की लोकप्रियता अपेक्षाकृत कम रही। डोनाल्ड ट्रंप को 39 प्रतिशत समर्थन मिला और वे शीर्ष दस नेताओं की सूची में स्थान नहीं बना सके। वहीं कीर स्टार्मर को 24 प्रतिशत तथा इमैनुएल मैक्रॉन को केवल 17 प्रतिशत अनुमोदन मिला, जिससे वे सूची के निचले हिस्से में रहे।
विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी की लगातार ऊंची लोकप्रियता भारत में उनके नेतृत्व, नीतिगत फैसलों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय भूमिका का परिणाम है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने वैश्विक मंच पर अपनी उपस्थिति मजबूत की है, जिसका असर देश के नेतृत्व की छवि पर भी दिखाई देता है।
यह सर्वेक्षण ऐसे समय सामने आया है जब प्रधानमंत्री मोदी सार्वजनिक जीवन में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि भी दर्ज कर चुके हैं। वे देश के सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले नेताओं में शामिल हो गए हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल और उसके बाद प्रधानमंत्री पद पर लगातार लंबे समय तक नेतृत्व ने उन्हें भारतीय राजनीति में विशेष स्थान दिलाया है।
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार घरेलू स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन, बुनियादी ढांचे के विस्तार, सामाजिक कार्यक्रमों और वैश्विक कूटनीति में सक्रियता ने प्रधानमंत्री मोदी की स्वीकार्यता को लगातार मजबूत किया है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय सर्वेक्षणों में भी वे लगातार शीर्ष स्थान पर बने हुए हैं।
यह परिणाम भारत की वैश्विक छवि के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि भारतीय नेतृत्व को केवल देश के भीतर ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी व्यापक पहचान और समर्थन मिल रहा है।
