छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग द्वारा आयोजित दो दिवसीय ‘नवा प्रांतीय सम्मेलन’ (नवम अधिवेशन) का भव्य समापन बिलासपुर स्थित सिम्स ऑडिटोरियम में संपन्न हुआ। इस गरिमामय अवसर पर प्रदेश के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ी भाषा के संरक्षण, संवर्धन और उसे संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के प्रयासों को गति देना रहा।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ी भाषा प्रदेश की आत्मा और पहचान है। उन्होंने आमजन से अपील की कि भाषा के निरंतर विकास के लिए दैनिक जीवन, पारिवारिक संवाद और सामाजिक व्यवहार में छत्तीसगढ़ी का अधिक से अधिक प्रयोग किया जाए। उन्होंने कहा कि जब तक भाषा जनजीवन से जुड़ी रहेगी, तब तक उसकी जड़ें मजबूत रहेंगी।
सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे अतिथियों और विशिष्ट अतिथि बिल्हा विधायक श्री धरमलाल कौशिक एवं बेलतरा विधायक श्री सुशांत शुक्ला ने छत्तीसगढ़ राज्य गठन से लेकर अब तक की भाषाई और साहित्यिक विकास यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने बिलासपुर के प्रतिष्ठित साहित्यकार डॉ. पालेश्वर प्रसाद शर्मा, श्यामलाल चतुर्वेदी और नंदकिशोर शुक्ला के योगदान को स्मरण करते हुए उन्हें छत्तीसगढ़ी साहित्य के स्तंभ बताया।
छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष डॉ. विनय पाठक ने स्वागत उद्बोधन दिया, जबकि आयोग की सचिव डॉ. अभिलाषा बेहार ने सम्मेलन की रूपरेखा और उद्देश्यों को विस्तार से प्रस्तुत किया। सम्मेलन के दौरान साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले रचनाकारों को सम्मानित किया गया। वरिष्ठ साहित्यकार सरला शर्मा, बंशीधर लाल, डॉ. विजय सिन्हा, डॉ. कृष्ण कुमार चंद्रा, डॉ. डी.पी. देशमुख और मोहनलाल डहरिया को शाल, श्रीफल और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर मंच से विभिन्न लेखकों की 13 नई पुस्तकों का लोकार्पण भी किया गया, जिसे साहित्य प्रेमियों ने विशेष उत्साह के साथ सराहा। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ पब्लिक स्कूल (पाली) और शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय (भरनी) के विद्यार्थियों ने छत्तीसगढ़ी गीतों पर मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर लोककला की सुंदर झलक दिखाई।
कार्यक्रम का सफल संचालन विजय मिश्रा ‘अमित’ ने किया। सम्मेलन के दौरान संस्कृति, साहित्य और भाषा के संगम ने यह संदेश दिया कि छत्तीसगढ़ी भाषा और साहित्य का भविष्य उज्ज्वल है और इसके संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।
