जैसे ही घड़ी ने रात 12 बजाए, पूरा देश नए साल के जश्न में डूब गया। आतिशबाजी, रोशनी और संगीत के बीच लोगों ने एक-दूसरे को नववर्ष की शुभकामनाएं दीं। देश के लगभग सभी शहर दुल्हन की तरह सजे नजर आए और सड़कों, बाजारों व प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर भारी भीड़ उमड़ी। इस दौरान पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े और चाक-चौबंद इंतजाम किए, ताकि जश्न शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।
पूरी दुनिया में भी नए साल 2026 के स्वागत को लेकर उत्साह चरम पर रहा। अलग-अलग देशों में लोगों ने अपने-अपने अंदाज में नए वर्ष का स्वागत किया। रंगीन रोशनी, आतिशबाजी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से शहर जगमगा उठे। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को नववर्ष की शुभकामनाएं दीं। उनके साथ ही अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी नागरिकों के लिए सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।
एशिया में नए साल का पहला नजारा फिलीपींस की राजधानी मनीला में देखने को मिला, जहां आतिशबाजी और सामुदायिक कार्यक्रमों के साथ 2026 का स्वागत किया गया। चीन के प्रमुख शहरों में भी रोशनी, आतिशबाजी और पारंपरिक आयोजनों के बीच नए साल की शुरुआत हुई। हांगकांग में ऊंची इमारतों पर काउंटडाउन क्लॉक दिखाई दिए और बड़ी संख्या में लोग जश्न में शामिल हुए। मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर और चीन के कई अन्य शहरों में भी पारंपरिक कार्यक्रमों और रोशनी के बीच नववर्ष का स्वागत किया गया।
सिंगापुर के मरीना बे क्षेत्र में शानदार आतिशबाजी ने आसमान को रंगों से भर दिया। सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट में हजारों लोग एकत्र हुए, जहां ऊंची इमारतों पर काउंटडाउन के साथ जैसे ही घड़ी ने आधी रात का संकेत दिया, जश्न शुरू हो गया। हांगकांग में भी इमारतों पर दिखाई देने वाले काउंटडाउन के साथ नए साल का स्वागत किया गया।
दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया में नए साल का स्वागत पारंपरिक और सांस्कृतिक तरीकों से किया गया। आधी रात होते ही विशाल घंटियों की गूंज के साथ नववर्ष का आगमन हुआ। कोरियाई देशों में नए साल का पर्व आधुनिक आतिशबाजी से अधिक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक भावनाओं के साथ मनाया जाता है। लोग परिवार और समुदाय के साथ एकत्र होकर बीते वर्ष को विदा करते हैं और आने वाले साल में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। ऐतिहासिक घड़ी मीनारों और सार्वजनिक स्थलों पर आयोजित विशेष कार्यक्रमों में घंटियों की आवाज नए आरंभ का प्रतीक मानी जाती है।
जापान में नए साल 2026 की शुरुआत गहरी श्रद्धा और भक्ति के साथ हुई। जापान में 31 दिसंबर की रात को ‘ओमिसोका’ कहा जाता है, जिसे नए साल का सबसे पवित्र समय माना जाता है। इस दौरान बौद्ध मंदिरों में ‘जोया नो काने’ की परंपरा निभाई जाती है, जिसके तहत मंदिरों की विशाल घंटियां 108 बार बजाई जाती हैं। मान्यता है कि ये 108 ध्वनियां मनुष्य के 108 सांसारिक विकारों का नाश करती हैं। लोग मंदिरों में प्रार्थना करते हैं, आत्ममंथन करते हैं और शुद्ध मन के साथ नए साल में प्रवेश करते हैं।
ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में भी नए साल 2026 का भव्य स्वागत हुआ। सिडनी हार्बर ब्रिज और ओपेरा हाउस के आसपास हुई शानदार आतिशबाजी ने आसमान को रंगीन रोशनी से भर दिया। लाखों लोगों ने इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनते हुए नए साल का स्वागत किया।
