मैस जनरल ब्रिघम और डाना-फ़ार्बर कैंसर इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने एक क्रांतिकारी अध्ययन में यह पाया है कि जेनेटिकली इंजीनियर ‘ओंकोलिटिक वायरस’ की एक एकल खुराक मस्तिष्क के ट्यूमर के भीतर इम्यून सेल्स को सक्रिय कर सकती है। ‘सेल’ (Cell) नामक जर्नल में प्रकाशित यह अध्ययन बताता है कि कैसे इस तकनीक ने ग्लियोब्लास्टोमा जैसी घातक बीमारी से जूझ रहे मरीजों के जीवन काल को बढ़ाने में मदद की है। ग्लियोब्लास्टोमा प्राथमिक मस्तिष्क कैंसर का सबसे आक्रामक रूप माना जाता है जिसे अब तक ‘कोल्ड ट्यूमर’ कहा जाता था क्योंकि इसमें कैंसर से लड़ने वाली कोशिकाएं प्रवेश नहीं कर पाती थीं।
डॉ. काई वुचरफ़ेननिग के अनुसार ग्लियोब्लास्टोमा पर अब तक इम्यूनोथेरेपी इसलिए बेअसर रहती थी क्योंकि इम्यून सेल्स ट्यूमर के भीतर तक नहीं पहुँच पाती थीं लेकिन इस नए क्लीनिकल ट्रायल ने साबित कर दिया है कि इन महत्वपूर्ण कोशिकाओं को ट्यूमर के केंद्र तक लाना अब संभव है। यह थेरेपी डॉ. ई. एंटोनियो चियोका द्वारा विकसित एक संशोधित हर्पीज सिम्प्लेक्स वायरस पर आधारित है जिसे इस तरह तैयार किया गया है कि वह केवल ग्लियोब्लास्टोमा कोशिकाओं के भीतर ही अपनी संख्या बढ़ाए और स्वस्थ ऊतकों को कोई नुकसान न पहुँचाए।
यह वायरस जब एक बार कैंसर कोशिका के अंदर पहुँचता है तो उसे नष्ट कर देता है और अपनी कई प्रतियाँ बनाता है जो आसपास की अन्य कैंसर कोशिकाओं को संक्रमित करती हैं। यह प्रक्रिया न केवल कैंसर कोशिकाओं को सीधे मारती है बल्कि शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को भी सक्रिय कर देती है। 41 रोगियों पर किए गए पहले चरण के परीक्षण में यह देखा गया कि जिन मरीजों में पहले से वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी मौजूद थी उन्हें इस उपचार से सबसे अधिक लाभ हुआ। शोधकर्ताओं ने पाया कि इस उपचार के बाद ट्यूमर के भीतर टी-सेल्स की मौजूदगी लंबे समय तक बनी रही जो सीधे तौर पर मरीज के बेहतर स्वास्थ्य और लंबी उम्र से जुड़ी थी। यह खोज पिछले 20 वर्षों से बिना किसी बड़े बदलाव के चल रहे ग्लियोब्लास्टोमा के इलाज के तरीकों में एक नया मोड़ ला सकती है।
साभार: मैस जनरल ब्रिघम (Mass General Brigham) और डाना-फ़ार्बर कैंसर इंस्टीट्यूट (Dana-Farber Cancer Institute) द्वारा जारी शोध रिपोर्ट और ‘सेल’ (Cell) जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के आधार पर।
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और इसे डॉक्टरी सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। लेख में वर्णित उपचार वर्तमान में शोध और क्लीनिकल ट्रायल के चरणों में है। किसी भी गंभीर बीमारी के इलाज या नई थेरेपी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या योग्य चिकित्सा विशेषज्ञ से परामर्श करें।
