पटना का गांधी मैदान इस वर्ष साहित्य, कला, स्वास्थ्य और सिनेमा के संगम का गवाह बनने जा रहा है। बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी ने 41वें पटना पुस्तक मेले का भव्य उद्घाटन किया। 5 दिसंबर से 16 दिसंबर तक चलने वाला यह आयोजन पटना के सांस्कृतिक कैलेंडर की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक है।
मेले के संयोजक अमित झा के अनुसार, उद्घाटन समारोह दोपहर 1 बजे आयोजित किया गया जिसमें दोनों नेता विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस बार की तैयारियां पहले से ज्यादा विस्तार और आधुनिकता के साथ की गई हैं।
दुनिया का सबसे महंगा ग्रंथ ‘मैं’ पहली बार प्रदर्शित
इस वर्ष मेले का सबसे बड़ा आकर्षण प्रसिद्ध साहित्यकार रत्नेश्वर द्वारा रचित दुनिया का सबसे महंगा ग्रंथ ‘मैं’ है, जिसकी कीमत 15 करोड़ रुपये बताई गई है। यह अनूठा ग्रंथ हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध होगा। दर्शकों को इसके साथ फोटो खिंचाने की अनुमति भी दी जाएगी। अनुमान है कि करीब 6 लाख लोग इस प्रदर्शनी को देखने पहुंचेंगे।
प्रवेश व्यवस्था और स्कूल- कॉलेज छात्रों के लिए विशेष सुविधा
गांधी मैदान में प्रवेश के लिए रामगुलाम चौक स्थित 10 नंबर गेट को मुख्य प्रवेश द्वार बनाया गया है। यहाँ तीन प्रवेश द्वार और टिकट काउंटर स्थापित किए गए हैं।
- स्कूल यूनिफॉर्म में आने वाले बच्चों के लिए प्रवेश निशुल्क है।
- कॉलेज छात्रों को सप्ताह के मध्य से शुक्रवार तक मुफ्त टिकट उपलब्ध कराए जाएंगे।
इस वर्ष मेले की थीम — ‘वेलनेस: अवे ऑफ लाइफ’
इस बार की मुख्य थीम ‘वेलनेस – अवे ऑफ लाइफ’ रखी गई है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य संवाद के दौरान विशेषज्ञ डॉक्टर हृदय, मस्तिष्क, त्वचा, हड्डी, पोषण, मधुमेह, फिजियोथेरेपी, गुर्दा और मानसिक स्वास्थ्य जैसे विषयों पर लोगों से सीधा संवाद करेंगे।
साहित्यकारों को समर्पित विशेष आयोजन
यह मेला प्रसिद्ध कथाकार अवधेश प्रीत को समर्पित है, जबकि एक्टिविटी ज़ोन का नाम मशहूर शायर क़ासिम खुर्शीद के नाम पर रखा गया है। आयोजन स्थल के द्वार और मंडप भी भारतीय ऋषियों और आचार्यों के नाम पर बनाए गए हैं—
अगस्त्य द्वार, विश्वामित्र द्वार, चरक द्वार, धन्वंतरि भवन, व्यास मंच, कश्यप मंच, माधव कला दीर्घा, भृगु हॉल और आचार्य सुश्रुत थिएटर प्रमुख आकर्षण रहेंगे।
300 से अधिक नए कार्यक्रम: साहित्य, कला, सिनेमा और संवाद का संगम
पिछले वर्षों की तुलना में इस बार 300 से ज्यादा नए कार्यक्रम आयोजित होंगे।
इनमें शामिल हैं— तेरी मेरी प्रेम कहानी, मुशायरा, कवि सम्मेलन, जनसंवाद, युवा स्वर, ज्ञान और गुरुकुल, संपादक से संवाद, स्कूल उत्सव, हमारे हीरो, किताब के शब्द आदि।
इसके अलावा, पटना लिटरेरी फेस्टिवल और पुस्तक मेले के सहयोग से भव्य राष्ट्रीय मुशायरा और कवि सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जिसमें देश के नामचीन शायर और लोकप्रिय कवि प्रस्तुति देंगे।
फिल्म प्रेमियों के लिए विशेष सिनेमाघर
फिल्म प्रेमियों के लिए एक अलग सिनेमाघर बनाया गया है, जिसमें फीचर फिल्में, शॉर्ट फिल्में और डॉक्यूमेंट्री दिखाई जाएंगी।
मुख्य आकर्षण होंगी—
- पंकज त्रिपाठी की ‘लाली’
- अखिलेंद्र मिश्रा की ‘बारात’
200 स्टॉल और बड़े प्रकाशकों की मौजूदगी
इस बार मेले में कुल 200 स्टॉल लगाए गए हैं। प्रमुख प्रकाशकों में शामिल हैं—
प्रभात प्रकाशन, राजकमल, वाणी, ज्ञानपीठ, उपकार, दिनकर पुस्तकालय, सेतु, सम्यक, ओसवाल बुक्स, खन्ना पब्लिशर्स, मंजुल प्रकाशन, एनसीपीयूएल आदि।
पटना पुस्तक मेला 2025: पाठकों के लिए बहुआयामी अनुभव
41वां पटना पुस्तक मेला साहित्य प्रेमियों, कला दर्शकों, स्वास्थ्य जागरूक नागरिकों और फिल्म प्रेमियों के लिए एक अनूठा और बहुआयामी अनुभव लेकर आया है। यह आयोजन पटना की सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत बनाते हुए एक यादगार उत्सव साबित होगा।
