प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को किसानों के महत्व को रेखांकित करते हुए एक प्रेरणादायक संस्कृत सुभाषित साझा किया। उन्होंने कहा कि समाज का अस्तित्व किसानों पर ही टिका हुआ है और उनके बिना मानव जीवन की कल्पना भी संभव नहीं है। प्रधानमंत्री ने यह संदेश सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट के माध्यम से दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर लिखा कि चाहे किसी व्यक्ति के पास कितनी ही भौतिक संपदा क्यों न हो, लेकिन भोजन के लिए उसे अंततः किसानों पर ही निर्भर रहना पड़ता है। उन्होंने किसानों को समाज की आधारशिला बताते हुए उनके परिश्रम और योगदान को नमन किया।
प्रधानमंत्री द्वारा साझा किया गया संस्कृत सुभाषित इस प्रकार है—
“सुवर्ण-रौप्य-माणिक्य-वसनैरपि पूरिताः।
तथापि प्रार्थयन्त्येव कृषकान् भक्ततृष्णया॥”
सुवर्ण-रौप्य-माणिक्य-वसनैरपि पूरिताः।
— Narendra Modi (@narendramodi) December 23, 2025
तथापि प्रार्थयन्त्येव कृषकान् भक्ततृष्णया।। pic.twitter.com/C3DXH9O0a7
इस सुभाषित का भावार्थ यह है कि चाहे किसी व्यक्ति के पास सोना, चांदी, माणिक्य और उत्तम वस्त्रों जैसी सभी भौतिक सुविधाएं उपलब्ध हों, फिर भी भोजन प्राप्त करने के लिए उसे किसानों की ओर ही देखना पड़ता है। अन्न के बिना जीवन संभव नहीं है और अन्न का स्रोत किसान ही होता है।
प्रधानमंत्री का यह संदेश किसानों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का प्रतीक है। उन्होंने एक बार फिर यह स्पष्ट किया कि किसान केवल अन्नदाता ही नहीं, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र की जीवनरेखा हैं। उनके श्रम, समर्पण और योगदान के बिना विकास की कोई भी परिकल्पना अधूरी है।
