उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज पंतनगर स्थित गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में आयोजित एक सौ उन्नीसवें अखिल भारतीय किसान मेला एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया तथा विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित साहित्य का विमोचन भी किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान, कृषि विशेषज्ञ, जनप्रतिनिधि और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंतनगर विश्वविद्यालय में आयोजित यह कृषि मेला किसानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि ऐसे आयोजनों से उन्हें खेती में हो रहे नवाचारों की जानकारी मिलती है और वैज्ञानिकों से सीधे संवाद का अवसर प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि किसान हमारे अन्नदाता हैं और देश के वास्तविक नायक भी हैं। किसानों की मेहनत और समर्पण से ही देश की खाद्य व्यवस्था मजबूत बनी हुई है और राष्ट्र विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत के संकल्प में किसानों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। गांव, क्षेत्र और देश की प्रगति किसानों की मेहनत पर आधारित है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा देश के करोड़ों किसानों को किसान सम्मान निधि का लाभ दिया जा रहा है और उत्तराखंड के नौ लाख से अधिक किसान भी इस योजना से लाभान्वित हो रहे हैं। हाल ही में किसान सम्मान निधि की नई किस्त जारी की गई है।
उन्होंने कहा कि खेती को जंगली जानवरों से सुरक्षित रखने के लिए खेतों की घेराबंदी हेतु केंद्र से पहली किश्त के रूप में पच्चीस करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। किसानों के हित में फसल बीमा योजना, मृदा स्वास्थ्य पत्र योजना, किसान मानधन योजना, बागवानी विकास योजना, कृषि यंत्र अनुदान योजना और बूंद-बूंद सिंचाई जैसी योजनाएं प्रभावी रूप से संचालित की जा रही हैं। किसान ऋण पत्र की सीमा भी बढ़ाकर पांच लाख रुपये कर दी गई है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश सरकार किसानों को तीन लाख रुपये तक का ऋण बिना ब्याज उपलब्ध करा रही है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए बहुउद्देश्यीय संरक्षित खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिसके लिए दो सौ करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। अब तक एक सौ पंद्रह करोड़ रुपये की लागत से तीन सौ पचास संरक्षित कृषि गृह स्थापित किए जा चुके हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए क्षेत्र विशेष के अनुसार योजनाएं बनाई जा रही हैं। नई सेब नीति के लिए बारह सौ करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। किसानों को अनेक योजनाओं में अस्सी प्रतिशत तक राज्य सहायता प्रदान की जा रही है। प्रदेश में सात सुगंध घाटियां विकसित की जा रही हैं और बढ़ती मांग को देखते हुए ड्रैगन फल की खेती को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में फलों के उत्पादन में वृद्धि हुई है और कुकुरमुत्ता उत्पादन अब सत्ताईस हजार मीट्रिक टन तक पहुंच गया है। इस क्षेत्र में उत्तराखंड देश में पांचवें स्थान पर पहुंच गया है। मधुमक्खी पालन और शहद उत्पादन की भी प्रदेश में अपार संभावनाएं हैं और वर्तमान में राज्य में तैंतीस सौ मीट्रिक टन शहद उत्पादन हो रहा है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान वित्तीय वर्ष में एक लाख ग्यारह हजार करोड़ रुपये का बजट पारित किया गया है, जिसमें कृषि, उद्यान, सुगंध फसल, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन और शोध कार्यों के लिए विशेष धनराशि निर्धारित की गई है।
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मनमोहन सिंह चौहान ने कहा कि मेले में तीन सौ पचास से अधिक प्रदर्शनी कक्ष लगाए गए हैं और प्रतिदिन लगभग बीस हजार लोग इसमें भाग ले रहे हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों और किसानों के हित में किए जा रहे कार्यों की जानकारी भी दी।
कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष अजय मौर्य, विधायक तिलक राज बेहड़, महापौर विकास शर्मा, विभिन्न जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी तथा बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
