रामनगरी अयोध्या मंगलवार को गहरे शोक में डूबी नजर आई, जब राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख स्तंभ और पूर्व सांसद डॉ. रामविलास दास वेदांती को अंतिम विदाई दी गई। हिंदू धाम आश्रम में उनके अंतिम दर्शन के लिए संत-महंतों, धर्माचार्यों, जनप्रतिनिधियों और श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या उमड़ी। हर आंख नम थी और हर जुबां पर वेदांती जी के योगदान की चर्चा थी।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी अयोध्या पहुंचे और डॉ. रामविलास दास वेदांती को श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने कहा कि वेदांती जी केवल एक संत नहीं थे, बल्कि राम मंदिर आंदोलन के सशक्त सूत्रधार थे। उनके जीवन का प्रत्येक क्षण सत्य, संघर्ष और समर्पण का प्रतीक रहा है। राम मंदिर निर्माण के लिए उनके द्वारा दिया गया योगदान सदियों तक स्मरणीय रहेगा।
डॉ. रामविलास दास वेदांती वर्ष 1983 से राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे और आंदोलन के हर चरण में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने देशभर में राम मंदिर आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाने में अहम योगदान दिया। राम कथा और भागवत कथा के माध्यम से उन्होंने धर्म का व्यापक प्रचार-प्रसार किया और हजारों लोगों को धार्मिक शिक्षा से जोड़ा।
हाल ही में वे राम मंदिर ध्वजारोहण समारोह में भी शामिल हुए थे, जहां उनकी भूमिका और योगदान को सभी ने सराहा। वेदांती जी एक प्रमुख हिंदू धार्मिक नेता होने के साथ-साथ 12वीं लोकसभा के सदस्य भी रहे। उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ लोकसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर सांसद चुने जाने के बाद उन्होंने संसद में भी सनातन मूल्यों और सांस्कृतिक मुद्दों को मजबूती से उठाया।
श्रद्धांजलि सभा में बड़ी संख्या में संत, महंत, जनप्रतिनिधि और समर्थक मौजूद रहे। सभी ने डॉ. वेदांती के योगदान को नमन करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। राम के नाम पर जीवन जीने वाले और राम के कार्य में अपनी सांसें समर्पित करने वाले इस महान संत का जाना न केवल राम मंदिर आंदोलन बल्कि समस्त सनातन धर्म के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। अयोध्या ने मंगलवार को ऐसे संत को विदा किया, जिनका नाम इतिहास के पन्नों में सदैव अमर रहेगा।
