विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने सोमवार को राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM) के अंतर्गत एक बड़ा एलान किया। उन्होंने IIT Bombay, IISc Bengaluru, IIT Kanpur और IIT Delhi में 720 करोड़ रुपये की अत्याधुनिक क्वांटम फैब्रिकेशन और केंद्रीय सुविधाओं की स्थापना की घोषणा की।
भारत के तकनीकी स्वावलंबन की दिशा में बड़ा कदम
IIT Bombay के दौरे के दौरान मंत्री ने कहा कि ये हाई-टेक क्वांटम सुविधाएँ भारत को तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ाएंगी और भारत को अगली पीढ़ी की क्वांटम तकनीकों में वैश्विक अग्रणी राष्ट्र के रूप में स्थापित करेंगी।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया के उन शुरुआती देशों में है, जिन्होंने राष्ट्रीय क्वांटम मिशन की शुरुआत कर इनोवेशन को तेजी से अपनाने का संकल्प दिखाया।
क्वांटम तकनीक को नई उड़ान
नई फैब्रिकेशन और कैरेक्टराइजेशन क्षमताएँ क्वांटम सेंसिंग, क्वांटम कंप्यूटिंग और क्वांटम मैटेरियल्स जैसे क्षेत्रों में शोध को गति देंगी। इससे स्वदेशी, सुरक्षित और स्केलेबल क्वांटम डिवाइसेस और सिस्टम विकसित करने के लिए एक मजबूत हार्डवेयर इकोसिस्टम तैयार होगा।
ये सुविधाएँ न सिर्फ NQM के शोधकर्ताओं के लिए, बल्कि देश के अन्य अकादमिक संस्थानों, उद्योग, स्टार्ट-अप्स और रणनीतिक क्षेत्रों के लिए भी उपलब्ध रहेंगी।
IITs को मिली महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ
मंत्री ने बताया:
- IIT Bombay और IIT Kanpur – देश के क्वांटम सेंसिंग और मेट्रोलॉजी इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाएंगे।
- IISc Bengaluru और IIT Bombay – सुपरकंडक्टिंग, फोटोनिक और स्पिन-क्यूबिट आधारित क्वांटम कंप्यूटिंग फैब्रिकेशन को आगे ले जाएंगे।
- IIT Delhi – क्वांटम मैटेरियल्स और क्वांटम डिवाइस डेवलपमेंट इकोसिस्टम की मेजबानी करेगा।
ये क्षमताएँ स्वदेशी क्वांटम डिवाइसेस के प्रोटोटाइपिंग, ट्रांसलेशनल रिसर्च और नई पीढ़ी के क्वांटम हार्डवेयर विशेषज्ञों के प्रशिक्षण को बढ़ावा देंगी।
क्वांटम तकनीक से स्वास्थ्य और विज्ञान में क्रांतिकारी बदलाव
जितेंद्र सिंह ने कहा कि मेडिकल साइंस अब इनवेसिव डायग्नोस्टिक पद्धतियों से आगे बढ़कर फिजिक्स आधारित नॉन-इनवेसिव थेरैप्यूटिक्स की ओर बढ़ रही है। क्वांटम तकनीक इस बदलाव को और तेज करेगी, जिससे:
- स्वास्थ्य सेवाएँ
- डायग्नोस्टिक्स
- इमेजिंग
- मैटेरियल साइंस
- एडवांस कंप्यूटिंग
जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति होगी।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय की मेडिकल एजुकेशन में फिजिक्स एक मुख्य विषय बन सकती है, और IITs व IISc पहले से मेडिकल-टेक इंटीग्रेशन की दिशा में काम कर रहे हैं।
संस्थानों के बीच सहयोग पर जोर
मंत्री ने कहा कि रिसर्च तब तक प्रभावी नहीं हो सकती जब तक उसे वास्तविक उपयोग में न लाया जाए। इसलिए IITs, AIIMS, IIMs, CSIR लैब्स और अन्य संस्थानों के बीच उनके द्वारा करवाए गए मल्टी-इंस्टीट्यूशनल MoUs इसका मजबूत उदाहरण हैं। इसका उद्देश्य है:
- बाज़ार लिंकज को मजबूत करना
- वैज्ञानिक उपलब्धियों को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना
राष्ट्रीय क्वांटम मिशन भारत को भविष्य की तकनीक में नए शिखर पर ले जाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
