भारतीय अर्थव्यवस्था और मौद्रिक नीति से जुड़ी अहम रिपोर्ट में बैंक ऑफ बड़ौदा ने संकेत दिया है कि भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने संभवतः ब्याज दरों में कटौती का सिलसिला खत्म कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक जब तक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) और सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की नई सीरीज़ से कोई बड़ा अप्रत्याशित बदलाव सामने नहीं आता, तब तक ब्याज दरों में और कटौती की संभावना कम दिखाई दे रही है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि RBI के हालिया पॉलिसी संकेत, खासतौर पर उसका न्यूट्रल पॉलिसी रुख, इस बात की ओर इशारा करते हैं कि मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) अब लगातार दर कटौती करने के बजाय वित्तीय स्थिरता बनाए रखते हुए आर्थिक विकास को समर्थन देने पर ध्यान दे रही है। बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट में कहा गया है कि RBI अब लंबे समय तक ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं कर सकता।
RBI गवर्नर ने अपने हालिया मौद्रिक नीति बयान में कहा कि कम महंगाई दर से वित्तीय स्थिरता बनाए रखते हुए आर्थिक विकास को समर्थन देने की गुंजाइश बनती है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय बैंक देश में विकास की गति बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
रिपोर्ट के अनुसार, न्यूट्रल पॉलिसी स्टांस के साथ RBI यह संकेत दे रहा है कि आसान मौद्रिक नीति का चक्र अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है और आने वाले समय में पॉलिसी दरों को स्थिर रखा जा सकता है।
मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने दिसंबर 2025 में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती की थी। इसके बाद फरवरी 2026 की बैठक में पॉलिसी दरों को सर्वसम्मति से अपरिवर्तित रखने का फैसला लिया गया। मौद्रिक नीति का रुख न्यूट्रल रखा गया, जो आर्थिक विकास और महंगाई नियंत्रण के बीच संतुलन को दर्शाता है। फिलहाल रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर स्थिर है।
लिक्विडिटी मैनेजमेंट को लेकर RBI ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर सिस्टम में पर्याप्त नकदी उपलब्ध कराई जाएगी। केंद्रीय बैंक ने पूरे वित्त वर्ष की विकास दर और महंगाई दर के अनुमान अप्रैल 2026 तक टाल दिए हैं, क्योंकि वह नई CPI और GDP सीरीज़ जारी होने का इंतजार कर रहा है, जो इस महीने के अंत तक जारी होने की संभावना है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अप्रैल 2026 की मौद्रिक नीति बैठक से पूरे साल की अर्थव्यवस्था और महंगाई के दृष्टिकोण पर ज्यादा स्पष्टता मिल सकती है। मौजूदा मैक्रोइकोनॉमिक स्थिति और संशोधित महंगाई अनुमानों को देखते हुए रिपोर्ट का मानना है कि RBI फिलहाल ब्याज दरों में बदलाव से बचते हुए स्थिर रुख बनाए रख सकता है।
