भागलपुर जिले के आकांक्षी प्रखंड पीरपैंती की प्यालपुर पंचायत निवासी रेखा दीदी आज अपने क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण और रोजगार सृजन की प्रेरणादायक पहचान बन चुकी हैं। उन्होंने केंद्र और बिहार सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ महिलाओं तक पहुंचाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का सराहनीय कार्य किया है।
रेखा दीदी की शादी महज 18 वर्ष की उम्र में हो गई थी। उनके पति रोजगार के लिए अक्सर गुजरात में मजदूरी करने जाते थे, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर बनी रहती थी। कठिन परिस्थितियों के बावजूद रेखा दीदी ने हार नहीं मानी। उन्हें जीविका योजना की जानकारी मिली और उन्होंने अपने गांव में महिला समूह का गठन किया। बाद में वे समूह की सीएम (समूह प्रमुख) बनीं और महिलाओं को संगठित कर उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ने का काम शुरू किया।
समूह प्रमुख बनने के लिए न्यूनतम मैट्रिक उत्तीर्ण होना जरूरी था। इसके लिए उनके पति ने उनका सहयोग किया और उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की। इसके बाद रेखा दीदी ने गांव की महिलाओं को प्रशिक्षण, ऋण और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए। अब तक वे 25 से 30 महिलाओं को आत्मनिर्भर बना चुकी हैं।
रेखा दीदी ने महिलाओं को प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) के तहत चाय स्टॉल, मशरूम उत्पादन, पकोड़े की दुकान, सत्तू निर्माण और बकरी पालन जैसे कार्यों से जोड़ा। बिहार सरकार की ओर से मिलने वाली ₹10,000 की आर्थिक सहायता से कई महिलाओं ने बकरी पालन शुरू किया। उनके मशरूम उत्पादन इकाई से 10 से 12 महिलाओं को प्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है। साथ ही, मशरूम की बिक्री न होने पर उसका अचार बनाकर बाजार में बेचा जाता है, जिससे नुकसान से बचाव होता है।
रेखा दीदी से जुड़ी महिलाओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि जीविका समूह से जुड़कर उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया है। पूजा दीदी सिलाई मशीन से घर बैठे कमाई कर रही हैं। सपना दीदी मशरूम उत्पादन और मसाला पैकिंग के जरिए प्रतिमाह ₹7,000 से ₹10,000 तक कमा रही हैं। फोटनी देवी प्रतिदिन लगभग ₹200 की आय अर्जित कर रही हैं। सोनी दीदी ने चाय का स्टॉल खोलकर अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार किया है। अर्चना दीदी ने जीविका योजना से मिले ₹10,000 से बकरी पालन शुरू किया और अब अपना व्यवसाय बढ़ा रही हैं। वहीं शिल्पा दीदी ने ऋण लेकर आटा चक्की और चना-सत्तू उत्पादन का कार्य शुरू किया, जिससे उनकी आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
आज रेखा दीदी पूरे पीरपैंती प्रखंड में महिलाओं को रोजगार देने और आत्मनिर्भर बनाने की मिसाल बन चुकी हैं। उनके प्रयासों से कभी असहाय मानी जाने वाली महिलाएं अब अपने पैरों पर खड़ी हैं और उनके द्वारा उत्पादित मशरूम स्थानीय बाजार से लेकर अन्य शहरों तक भेजे जा रहे हैं।
जीविका के बीपीएम दीपक कुमार के अनुसार, मुख्यमंत्री रोजगार योजना के तहत महिलाओं को समूहों से जोड़कर उन्हें प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं। जब महिलाएं आत्मनिर्भर बनती हैं तो इसका सकारात्मक प्रभाव जीविका प्रणाली पर भी पड़ता है।
रेखा दीदी की सफलता की कहानी यह साबित करती है कि सही मार्गदर्शन, मजबूत इच्छाशक्ति और सरकारी योजनाओं के प्रभावी उपयोग से महिलाएं न केवल अपना जीवन बदल सकती हैं, बल्कि पूरे समाज को भी नई दिशा दे सकती हैं।
