शब-ए-बरात के पावन पर्व के बाद रोहतास जिले की ऐतिहासिक चंदतन शहीद पहाड़ी पर पारंपरिक उर्स मेले की शुरुआत हो गई है। मेले के पहले ही दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु हजरत चंदतन शहीद पीर की मजार पर पहुंचे और चादरपोशी कर देश में अमन, शांति और सलामती की दुआ मांगी।
दो दिवसीय उर्स मेला गुरुवार से औपचारिक रूप से शुरू हुआ। इस मेले में केवल बिहार ही नहीं बल्कि झारखंड, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा और उत्तर प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। मेला परिसर और आसपास के क्षेत्रों में दंडाधिकारी और पुलिस बल की तैनाती की गई है, ताकि मेला शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सके।
मरकाजी दरगाह कमेटी के जिलाध्यक्ष जी.एम. अंसारी ने बताया कि हजरत चंदतन शहीद पीर रहमतुल्लाह अलैह मदीना शरीफ से सासाराम आए थे। उन्होंने बताया कि उनका आगमन हसन खां सूरी के समय से लगभग 150 वर्ष पहले हुआ था। युद्ध के दौरान शहीद होने के बाद उनका पार्थिव शरीर इसी पहाड़ी पर सुपुर्द-ए-खाक किया गया। तभी से यह स्थान आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है और यहां हर वर्ष उर्स मेले का आयोजन किया जाता है।
उन्होंने बताया कि मजार से जुड़ी आस्था और मन्नत पूरी होने की मान्यता के कारण हर साल श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। उर्स मेले के दौरान श्रद्धालुओं में गहरी श्रद्धा और उत्साह देखने को मिल रहा है। प्रशासन और स्थानीय समिति की निगरानी में पूरा आयोजन शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न कराया जा रहा है।
