रोहतास जिले में रोहतासगढ़ किले तक पहुंच को सुगम बनाने के लिए बनाए जा रहे रोपवे का ट्रायल शुक्रवार को एक बड़े हादसे में तब्दील हो गया। परीक्षण के दौरान ही रोपवे का पूरा ढांचा अचानक धराशायी हो गया। इस दौरान रोपवे के कई खंभे उखड़ गए और यात्रियों को ले जाने वाला केबिन (डोला) टूटकर नीचे गिर पड़ा। गनीमत रही कि ट्रायल के समय केबिन में कोई भी व्यक्ति सवार नहीं था, जिससे एक बड़ी जनहानि टल गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अभियंताओं और तकनीकी विशेषज्ञों की मौजूदगी में रोपवे का ट्रायल शुरू किया गया था। खाली केबिन को अकबरपुर की ओर से रोहतासगढ़ किले की दिशा में भेजा गया। कुछ ही दूरी तय करने के बाद रोपवे के लिए बनाया गया एक पिलर अचानक गिर गया। इसके बाद देखते ही देखते एक के बाद एक कई पिलर धराशायी हो गए और पूरा रोपवे सिस्टम केबिन समेत सभी मशीनों के साथ नीचे गिर पड़ा।
बताया जा रहा है कि हादसा इतना अचानक हुआ कि मौके पर मौजूद अधिकारी और कर्मचारी भी स्तब्ध रह गए। यदि ट्रायल के दौरान केबिन में लोग सवार होते, तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी। फिलहाल किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन परियोजना की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
गौरतलब है कि इस रोपवे परियोजना का लोकार्पण नए साल के अवसर पर प्रस्तावित था। करीब 13 करोड़ 65 लाख रुपये की लागत से इस परियोजना का निर्माण पिछले छह वर्षों से चल रहा था। वर्ष 2019 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना का शिलान्यास किया था। रोपवे के जरिए रोहतासगढ़ किले तक पहुंच का समय काफी कम होने की उम्मीद थी।
हादसे के बाद स्थानीय लोगों में भारी निराशा देखी जा रही है। लोगों को उम्मीद थी कि रोपवे शुरू होने से लगभग 70 किलोमीटर का लंबा और कठिन रास्ता कुछ ही मिनटों में तय किया जा सकेगा, जिससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। हालांकि, ट्रायल के दौरान हुए इस हादसे ने फिलहाल इन उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
