उत्तर प्रदेश के संभल जिले में न्यायिक इतिहास का एक नया अध्याय जुड़ गया है। चंदौसी स्थित जिला न्यायालय में पहली बार मुकदमे की सुनवाई के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित ट्रांसक्रिप्शन तकनीक का इस्तेमाल कर गवाही दर्ज की गई। इसे न्यायिक प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और सटीक बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
इस दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट के प्रशासनिक न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल भी मौजूद रहे। जनपद न्यायाधीश के न्यायालय में एआई आधारित ट्रांसक्रिप्शन टूल्स के जरिए गवाह का बयान रिकॉर्ड किया गया। यह प्रदेश में पहली बार है जब किसी मुकदमे में एआई तकनीक की मदद से गवाही दर्ज की गई है।
यह मामला जामा मस्जिद और हरिहर मंदिर सर्वे के दौरान हुई हिंसा से जुड़ा हुआ है। इस घटना में घायल हुए उपनिरीक्षक राजीव कुमार की गवाही एआई ट्रांसक्रिप्शन के माध्यम से दर्ज की गई। इस तकनीक के जरिए गवाह का बयान तुरंत रिकॉर्ड होकर प्रिंट हो जाता है, जिससे किसी प्रकार की छेड़छाड़ की संभावना समाप्त हो जाती है और समय की भी बचत होती है।
जानकारी के अनुसार 24 नवंबर 2024 को संभल में विवादित धार्मिक स्थल श्री हरिहर मंदिर और शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हिंसा भड़क गई थी। सर्वे को रोकने के लिए बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए थे और हालात बेकाबू हो गए थे। इस दौरान भीड़ द्वारा पुलिस पर पथराव और फायरिंग की गई थी, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई थी।
इस घटना में एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई, सीओ अनुज चौधरी और डिप्टी कलेक्टर समेत करीब 29 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। मामले में संभल कोतवाली और थाना नखासा में कुल 12 एफआईआर दर्ज की गई थीं। इसमें सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क और सपा विधायक इकबाल महमूद के बेटे सुहैल इकबाल समेत 1250 से अधिक लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था।
प्रशासन और न्यायिक अधिकारियों का मानना है कि एआई तकनीक का इस्तेमाल न्याय प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और तेज बनाएगा। इससे गवाहों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया में सुधार होगा और न्याय मिलने में लगने वाला समय भी कम होगा। विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में न्यायिक व्यवस्था में एआई का उपयोग और बढ़ सकता है।
