डेनमार्क के 1,000 से अधिक प्रतिभागियों पर आधारित अध्ययन
एक नए अध्ययन में यह चेतावनी दी गई है कि बच्चों और युवाओं में टीवी, मोबाइल, टैबलेट, कंप्यूटर या गेमिंग पर अधिक समय बिताना हृदय रोग और मेटाबोलिक समस्याओं का जोखिम काफी बढ़ा देता है। इसमें उच्च रक्तचाप, खराब कोलेस्ट्रॉल स्तर और इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसे जोखिम शामिल हैं। यह अध्ययन जर्नल ऑफ द अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन में प्रकाशित हुआ है।
अध्ययन की मुख्य बातें
- स्क्रीन टाइम बढ़ने से हृदय और मेटाबोलिक जोखिम बढ़ते हैं।
- जिन बच्चों और युवाओं की नींद कम होती है, उनमें यह जोखिम और अधिक होता है।
- विशेषज्ञों के अनुसार स्वस्थ जीवनशैली बनाए रखने के लिए युवाओं में स्क्रीन उपयोग को नियंत्रित किया जाना जरूरी है।
डेनमार्क के अध्ययन में मिली चिंताजनक तस्वीर
डेनमार्क के दो शोध समूहों से प्राप्त डेटा में पाया गया कि:
- 10 वर्ष के बच्चों और
- 18 वर्ष के युवाओं
दोनों में स्क्रीन टाइम बढ़ने के साथ कार्डियोमेटाबोलिक जोखिम में निरंतर वृद्धि देखी गई।
अध्ययन के प्रमुख लेखक डेविड हॉर्नर, M.D., Ph.D., कोपेनहेगन विश्वविद्यालय (COPSAC) से बताते हैं:
“बचपन और किशोरावस्था में फालतू स्क्रीन टाइम को सीमित करना दीर्घकालिक हृदय स्वास्थ्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।”
शोध कैसे किया गया?
शोधकर्ताओं ने दो समूहों के डेटा का विश्लेषण किया:
1. 2010 समूह (10 वर्ष के बच्चे):
- स्क्रीन टाइम:
- 6 साल की उम्र में औसत 2 घंटे/दिवस
- 10 साल की उम्र में 3.2 घंटे/दिवस
- कुल प्रतिभागी: 657 (6 वर्ष), 630 (10 वर्ष)
2. 2000 समूह (18 वर्ष के युवा):
- औसत स्क्रीन टाइम: 6.1 घंटे/दिन
- कुल प्रतिभागी: 364
स्क्रीन टाइम में टीवी/फिल्में देखना, गेमिंग और मोबाइल/कंप्यूटर का मनोरंजन हेतु उपयोग शामिल था।
हर अतिरिक्त घंटे से बढ़ता जोखिम
शोध के अनुसार:
- 10 साल के बच्चों में हर एक घंटे के स्क्रीन टाइम से
→ कार्डियोमेटाबोलिक स्कोर 0.08 SD बढ़ा - 18 साल के युवाओं में यह बढ़ोतरी
→ 0.13 SD थी।
अर्थात, यदि कोई बच्चा प्रतिदिन 3 घंटे अतिरिक्त स्क्रीन टाइम लेता है, तो उसका स्वास्थ्य जोखिम लगभग आधा SD बढ़ सकता है।
हॉर्नर कहते हैं:
“प्रति घंटे परिवर्तन छोटा लगता है, लेकिन जब स्क्रीन टाइम 4–6 घंटे तक पहुँच जाता है, यह गंभीर हो जाता है।”
नींद की कमी: जोखिम को और बढ़ाती है
कम नींद लेने वाले बच्चों और युवाओं में स्क्रीन टाइम का प्रभाव और अधिक खतरनाक पाया गया।
- लगभग 12% मेटाबोलिक जोखिम स्क्रीन टाइम के कारण नींद कम होने से प्रभावित था।
अर्थात,
स्क्रीन टाइम सिर्फ नींद चुराता ही नहीं, बल्कि उसी के साथ गंभीर स्वास्थ्य जोखिम भी बढ़ाता है।
स्क्रीन टाइम का ‘मेटाबोलिक फिंगरप्रिंट’
मशीन लर्निंग विश्लेषण में पाया गया कि:
- स्क्रीन टाइम के साथ खून में मेटाबोलाइट्स का एक खास पैटर्न जुड़ा था।
- यह “स्क्रीन टाइम फिंगरप्रिंट” शरीर में शुरुआती मेटाबोलिक बदलाव का संकेत देता है।
- किशोरावस्था में यह पैटर्न भविष्य के हृदय जोखिम का संकेत भी देता है।
विशेषज्ञ क्या सलाह देते हैं?
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन की डॉ. अमांडा पेराक कहती हैं:
“यदि स्क्रीन टाइम कम करना मुश्किल लगे, तो पहले सोने के समय में सुधार करें—स्क्रीन को रात में जल्दी बंद करना शुरू करें।”
विशेषज्ञों की महत्वपूर्ण सलाह:
- माता-पिता अपने बच्चों के सामने अच्छा स्क्रीन व्यवहार दिखाएँ
- भोजन के दौरान स्क्रीन बंद रखें
- बच्चों को बिना स्क्रीन के खुद को व्यस्त रखने की आदत डालें
- बोरियत को भी सीखने का एक हिस्सा समझें
शोध की सीमाएँ
- यह एक ऑब्जर्वेशनल अध्ययन है, इसलिए कारण और प्रभाव को पूरी तरह साबित नहीं करता।
- स्क्रीन टाइम अभिभावकों द्वारा रिपोर्ट किया गया, जो वास्तविक उपयोग से थोड़ा भिन्न हो सकता है।
Credits:
यह लेख American Heart Association द्वारा प्रदान की गई सामग्री पर आधारित है।
मूल अध्ययन: “Screen Time Is Associated With Cardiometabolic and Cardiovascular Disease Risk in Childhood and Adolescence”
लेखक: David Horner et al.
जर्नल: Journal of the American Heart Association (2025)
DOI: 10.1161/JAHA.125.041486
Disclaimer:
इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षणिक और जागरूकता उद्देश्य के लिए है। यह चिकित्सीय सलाह नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी चिंता या बीमारी के लिए डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।
