मार्केट रेगुलेटर सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने सोशल इम्पैक्ट फंड्स (SIFs) में व्यक्तिगत निवेशकों के लिए न्यूनतम निवेश राशि को काफी कम करने का प्रस्ताव रखा है। इस कदम का उद्देश्य सोशल स्टॉक एक्सचेंज (SSE) फ्रेमवर्क में निवेशकों की भागीदारी बढ़ाना और सामाजिक क्षेत्र में निवेश को मजबूत बनाना है।
सोमवार को सार्वजनिक सुझावों के लिए जारी कंसल्टेशन पेपर में सेबी ने बताया कि सोशल स्टॉक एक्सचेंज एडवाइजरी कमेटी (SSEAC) के साथ चर्चा के बाद यह प्रस्ताव तैयार किया गया है। प्रस्ताव के अनुसार, सोशल इम्पैक्ट फंड में व्यक्तिगत निवेशकों के लिए न्यूनतम निवेश सीमा को मौजूदा 2 लाख रुपये से घटाकर सिर्फ 1000 रुपये करने की योजना है।
सोशल इम्पैक्ट फंड एक सेबी रेगुलेटेड निवेश प्लेटफॉर्म होता है, जिसमें निजी तौर पर फंड जुटाया जाता है और इसे सामाजिक क्षेत्र में काम करने वाले संस्थानों, जैसे गैर-लाभकारी संगठनों और सामाजिक उद्यमों में लगाया जाता है। इन फंड्स का उद्देश्य गरीबी, स्वास्थ्य सेवाओं की कमी और अन्य सामाजिक चुनौतियों को दूर करने में मदद करना होता है। यह कैटेगरी-1 अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड (AIF) के तहत आते हैं और निवेशकों को आर्थिक लाभ के साथ सामाजिक प्रभाव पैदा करने का मौका देते हैं।
मौजूदा नियमों के तहत किसी भी व्यक्तिगत निवेशक को सोशल इम्पैक्ट फंड में कम से कम 2 लाख रुपये निवेश करना जरूरी होता है। यह फंड मुख्य रूप से सोशल स्टॉक एक्सचेंज पर रजिस्टर्ड या लिस्टेड गैर-लाभकारी संगठनों की सिक्योरिटीज में निवेश करते हैं।
सेबी का मानना है कि न्यूनतम निवेश सीमा कम करने से छोटे निवेशकों को भी सामाजिक निवेश का मौका मिलेगा। साथ ही यह बदलाव AIF नियमों को SEBI (Issue of Capital and Disclosure Requirements) नियम, 2018 के तहत जीरो कूपन जीरो प्रिंसिपल इंस्ट्रूमेंट्स (ZCZP) के लिए तय न्यूनतम आवेदन राशि के साथ संतुलित करेगा। वर्तमान में ZCZP के लिए न्यूनतम आवेदन राशि 1000 रुपये है, जो 19 मार्च 2025 से लागू है।
सेबी का कहना है कि इन सीमाओं को एक समान करने से सोशल इम्पैक्ट फंड्स में निवेश बढ़ेगा और सामाजिक क्षेत्र में काम करने वाले संगठनों को फंड जुटाने में मदद मिलेगी। यह प्रस्ताव सोशल स्टॉक एक्सचेंज फ्रेमवर्क को और मजबूत बनाने के लिए किए गए बड़े समीक्षा अभियान का हिस्सा है।
इसके अलावा सेबी ने सोशल स्टॉक एक्सचेंज पर बिना फंड जुटाए रजिस्टर्ड रहने वाले गैर-लाभकारी संगठनों के लिए समय सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव भी दिया है। वर्तमान नियम के अनुसार, कोई भी एनपीओ बिना फंड जुटाए अधिकतम 2 साल तक SSE पर रजिस्टर्ड रह सकता है। सेबी ने व्यावहारिक समस्याओं, जैसे कानूनी मंजूरी में देरी को ध्यान में रखते हुए इस अवधि को एक साल और बढ़ाने का सुझाव दिया है।
सेबी ने जीरो कूपन जीरो प्रिंसिपल इंस्ट्रूमेंट जारी करने के लिए न्यूनतम सब्सक्रिप्शन सीमा को 75 प्रतिशत से घटाकर 50 प्रतिशत करने का भी प्रस्ताव रखा है। खासतौर पर ऐसे मामलों में यह बदलाव लागू होगा जहां प्रोजेक्ट लागत और परिणामों को यूनिट के आधार पर बराबर तरीके से बांटा जा सकता है।
सेबी का मानना है कि इन बदलावों से गैर-लाभकारी संगठनों की भागीदारी बढ़ेगी और सोशल स्टॉक एक्सचेंज के जरिए फंड जुटाने की प्रक्रिया आसान होगी।
सेबी ने इस प्रस्ताव पर जनता और संबंधित पक्षों से सुझाव और प्रतिक्रिया मांगी है। रेगुलेटर ने कहा है कि अंतिम फैसला लेने से पहले सभी सुझावों पर विचार किया जाएगा।
