प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने तीन दिवसीय गुजरात दौरे के दौरान रविवार को ऐतिहासिक ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ में भाग लेंगे। यह आयोजन सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले आक्रमण के ठीक 1000 वर्ष और स्वतंत्रता के बाद इसके पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है। यह पर्व भारत की सांस्कृतिक विरासत, आस्था और अदम्य साहस का प्रतीक माना जा रहा है।
आज प्रधानमंत्री मोदी ‘शौर्य यात्रा’ में शामिल होंगे, जो उन वीरों के सम्मान में आयोजित की जा रही है जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी सोमनाथ महादेव के पवित्र धाम की रक्षा की। इसके बाद प्रधानमंत्री मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना कर भगवान सोमनाथ के दर्शन करेंगे और श्रद्धालुओं को संबोधित करेंगे। इस ऐतिहासिक अवसर पर देशभर से आए हजारों भक्तों की उपस्थिति में सोमनाथ नगरी आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर है।
कार्यक्रमों के क्रम में प्रधानमंत्री मोदी बाद में राजकोट में वाइब्रेंट गुजरात क्षेत्रीय सम्मेलन का उद्घाटन भी करेंगे। इससे पहले, शनिवार शाम को सोमनाथ पहुंचने पर प्रधानमंत्री ने मंदिर परिसर में ‘ओंकार मंत्र’ का जाप किया और भव्य ड्रोन शो का अवलोकन किया, जिसने सोमनाथ के गौरवशाली इतिहास को आधुनिक तकनीक के माध्यम से जीवंत कर दिया।
सोमनाथ महादेव मंदिर का इतिहास भारत की आस्था और पुनर्जागरण की अनुपम गाथा है। यह मंदिर भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में प्रथम माना जाता है। वर्ष 1026 में महमूद गजनवी के आक्रमण के दौरान मंदिर को भारी क्षति पहुंचाई गई, लेकिन इसके बाद भी भारतीय शासकों और समाज ने इसे बार-बार पुनर्निर्मित किया। सोलंकी शासक भीमदेव प्रथम सहित कई राजाओं ने इसके पुनर्निर्माण में योगदान दिया। मुगल काल में औरंगजेब के शासन के दौरान 17वीं शताब्दी में मंदिर को फिर से ध्वस्त किया गया।
18वीं शताब्दी में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने खंडहरों के पास एक नया मंदिर बनवाकर सोमनाथ की पूजा परंपरा को जीवित रखा। आधुनिक भारत में सोमनाथ के पुनर्निर्माण का निर्णायक क्षण तब आया जब 1947 में सरदार वल्लभभाई पटेल ने प्रभास पाटन के खंडहरों को देखकर मंदिर को उसके वैभव में पुनर्स्थापित करने का संकल्प लिया। उनके मार्गदर्शन में एक सार्वजनिक न्यास का गठन हुआ और वर्तमान भव्य चालुक्य शैली का मंदिर निर्मित किया गया, जिसका उद्घाटन 1951 में राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने किया।
आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सोमनाथ का विकास निरंतर आगे बढ़ रहा है। केंद्र सरकार की प्रसाद (PRASHAD) योजना के अंतर्गत मंदिर परिसर में आधुनिक सुविधाओं का विस्तार किया गया है। समुद्र दर्शन पथ, पर्यटक सुविधा केंद्र और नया संग्रहालय गैलरी जैसी परियोजनाओं ने सोमनाथ को आध्यात्मिक के साथ-साथ सांस्कृतिक पर्यटन का भी प्रमुख केंद्र बना दिया है। सोमनाथ आज भी भारत की अटूट आस्था, सांस्कृतिक स्वाभिमान और निरंतर पुनर्निर्माण की शक्ति का जीवंत प्रतीक बना हुआ है।
