हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 39वें सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेले में देश-विदेश से आए कलाकारों, कारीगरों और गणमान्य अतिथियों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि सूरजकुंड मेला भारत की समृद्ध कला, संस्कृति और ग्रामीण परंपराओं की जीवंत पहचान है और यह आयोजन पारंपरिक शिल्प को वैश्विक स्तर पर नई पहचान देने का मजबूत मंच बन चुका है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मेले में प्रदर्शित हर हस्तकला, हर रंग और हर शिल्प भारत के इतिहास, संस्कृति और मेहनतकश कारीगरों की कहानी को दर्शाता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे स्थानीय कारीगरों और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देकर देश की विरासत को संरक्षित करने में योगदान दें।
सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेला हर वर्ष फरवरी महीने में हरियाणा के फरीदाबाद स्थित सूरजकुंड में आयोजित किया जाता है। यह मेला भारतीय हस्तशिल्प, हथकरघा और लोक संस्कृति का विशाल प्रदर्शन माना जाता है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी पहचान है। इस मेले में देश-विदेश के कलाकार अपनी कला और उत्पादों का प्रदर्शन करते हैं तथा लाखों पर्यटक यहां पहुंचते हैं।
सरकार का मानना है कि इस तरह के आयोजन न केवल कारीगरों को सीधे बाजार उपलब्ध कराते हैं, बल्कि पारंपरिक कला और ग्रामीण अर्थव्यस्था को भी मजबूत करते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सूरजकुंड मेला कारीगरों को अपने उत्पाद सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाने का अवसर देता है और इससे उनकी आय बढ़ाने में मदद मिलती है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कला, संस्कृति और हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है और भविष्य में भी ऐसे आयोजनों को और अधिक मजबूत बनाया जाएगा।
