केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट पेश किया। यह उनका लगातार नौवां बजट है। इस बजट को सरकार ने “युवा शक्ति संचालित बजट” बताया है, जिसमें आर्थिक विकास तेज करने, लोगों की क्षमता बढ़ाने और हर परिवार व क्षेत्र तक संसाधन और अवसर पहुंचाने पर जोर दिया गया है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार सरकार ने विकास और राजकोषीय अनुशासन के बीच संतुलन बनाए रखने की रणनीति अपनाई है।
सरकार ने इस बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी, हेल्थ और रोजगार को विकास के मुख्य इंजन के रूप में रखा है। सरकार का सार्वजनिक पूंजीगत व्यय बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव रखा गया है, जिससे देश में बड़े स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को गति मिलेगी।
एमएसएमई सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए 10 हजार करोड़ रुपये का SME ग्रोथ फंड बनाया जाएगा, जिससे भविष्य के बड़े उद्योग तैयार किए जा सकेंगे। साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड भी बनाया जाएगा, जिससे छोटे उद्यमों को कर्ज देने में मदद मिलेगी।
टेक्सटाइल सेक्टर के लिए महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल, नेशनल फाइबर स्कीम और हैंडलूम व हैंडीक्राफ्ट कार्यक्रम के जरिए ग्रामीण रोजगार और उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
सरकार ने बायोफार्मा शक्ति योजना के तहत 5 साल में 10 हजार करोड़ रुपये निवेश का प्रस्ताव रखा है। इसके साथ तीन नए फार्मास्यूटिकल संस्थान और कई मौजूदा संस्थानों को अपग्रेड किया जाएगा, जिससे भारत को ग्लोबल बायोफार्मा हब बनाने में मदद मिलेगी।
इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में सात हाई स्पीड रेल कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव है, जबकि 20 नए नेशनल वाटरवे भी विकसित किए जाएंगे। इसके अलावा वाराणसी और पटना में जहाज मरम्मत इकोसिस्टम बनाया जाएगा।
ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने कार्बन कैप्चर, उपयोग और स्टोरेज के लिए 20 हजार करोड़ रुपये का फंड प्रस्तावित किया है। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग को भी मजबूत करने पर जोर दिया गया है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में कैंसर की दवाओं सहित 17 दवाओं पर कस्टम ड्यूटी हटाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा मेडिकल टूरिज्म बढ़ाने के लिए क्षेत्रीय मेडिकल हब बनाए जाएंगे और आयुर्वेद संस्थानों का विस्तार किया जाएगा।
टैक्स मोर्चे पर सरकार ने इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया है। हालांकि विदेशी शिक्षा और मेडिकल खर्च के लिए टीसीएस दर कम करने जैसे कदम उठाए गए हैं।
सरकार ने वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए 2026-27 में राजकोषीय घाटा जीडीपी के 4.3 प्रतिशत पर रखने का लक्ष्य रखा है।
कुल मिलाकर यह बजट मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी, युवाओं के रोजगार और हेल्थ सेक्टर को आगे बढ़ाने पर केंद्रित दिखाई देता है, जिसका उद्देश्य विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करना है।
