प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शहरी चुनौती कोष (Urban Challenge Fund – UCF) को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत कुल एक लाख करोड़ रुपए की केंद्रीय सहायता दी जाएगी। यह योजना India में शहरी विकास के मॉडल को अनुदान आधारित व्यवस्था से हटाकर बाजार आधारित, सुधार-उन्मुख और परिणाम केंद्रित ढांचे की ओर ले जाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।
सरकार के अनुसार, इस कोष के माध्यम से अगले पांच वर्षों में शहरी क्षेत्रों में कुल चार लाख करोड़ रुपए तक का निवेश होने की संभावना है। इस योजना के तहत परियोजना लागत का 25 प्रतिशत हिस्सा केंद्रीय सहायता के रूप में दिया जाएगा, लेकिन इसके लिए यह जरूरी होगा कि परियोजना लागत का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा बाजार से जुटाया जाए।
शहरी चुनौती कोष का मुख्य उद्देश्य उच्च गुणवत्ता वाले शहरी बुनियादी ढांचे का निर्माण करना है। इसके लिए बाजार वित्त, निजी क्षेत्र की भागीदारी और नागरिक-केंद्रित सुधारों को बढ़ावा दिया जाएगा। इस योजना के जरिए लचीले, समावेशी, उत्पादक और जलवायु-अनुकूल शहर विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि भविष्य में शहर देश की आर्थिक वृद्धि के प्रमुख इंजन बन सकें।
यह कोष वित्त वर्ष 2025-26 से लेकर वित्त वर्ष 2030-31 तक लागू रहेगा। जरूरत पड़ने पर इसकी अवधि 2033-34 तक बढ़ाई जा सकती है। योजना के तहत परियोजनाओं के लिए कम से कम 50 प्रतिशत फंडिंग बाजार स्रोतों से जुटानी होगी, जिसमें नगर निगम बॉन्ड, बैंक ऋण और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) शामिल हैं। बाकी फंड राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, शहरी निकायों या अन्य स्रोतों से जुटाया जाएगा।
परियोजनाओं का चयन पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी चुनौती प्रणाली के जरिए किया जाएगा, ताकि उच्च प्रभाव और सुधार आधारित परियोजनाओं को प्राथमिकता मिल सके। योजना में शहरी प्रशासन, वित्तीय सुधार, परिचालन दक्षता और शहरी नियोजन सुधारों पर विशेष जोर दिया जाएगा।
सरकार ने 5,000 करोड़ रुपए का विशेष कोष भी बनाया है, जिससे टियर-2 और टियर-3 शहरों सहित कुल 4223 शहरों की ऋण क्षमता बढ़ाई जाएगी। यह उन शहरों के लिए भी मददगार होगा जो पहली बार बाजार से फंड जुटाने की कोशिश करेंगे।
इसके अलावा, पूर्वोत्तर और पर्वतीय राज्यों के शहरों और छोटे शहरी निकायों के लिए 5,000 करोड़ रुपए की ऋण गारंटी योजना को भी मंजूरी दी गई है। इस योजना के तहत पहली बार लिए गए ऋण पर 7 करोड़ रुपए या ऋण राशि का 70 प्रतिशत (जो भी कम हो) तक केंद्रीय गारंटी दी जाएगी। पहले ऋण के सफल भुगतान के बाद 7 करोड़ रुपए या ऋण राशि का 50 प्रतिशत (जो भी कम हो) तक गारंटी दी जाएगी। इससे छोटे शहरों में 20 करोड़ रुपए से लेकर 28 करोड़ रुपए तक की परियोजनाओं को मजबूती मिलेगी।
इस कोष के तहत शहरों को आर्थिक विकास केंद्र के रूप में विकसित करने, हरित और अर्ध-हरित क्षेत्रों का विस्तार, ट्रांजिट और आर्थिक कॉरिडोर आधारित विकास, शहरी मोबिलिटी सुधार और आर्थिक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने वाली परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जाएगा।
योजना में शहरों के पुनर्विकास पर भी ध्यान दिया जाएगा, जिसमें केंद्रीय व्यावसायिक क्षेत्रों का आधुनिकीकरण, विरासत क्षेत्रों का संरक्षण, ब्राउनफील्ड पुनर्विकास, ट्रांजिट आधारित विकास और जलवायु अनुकूल अवसंरचना शामिल हैं। इसके अलावा जल आपूर्ति, सीवरेज, वर्षा जल प्रबंधन, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और स्वच्छता सुधार पर विशेष फोकस रहेगा।
शहरी चुनौती कोष के तहत फंड जारी करना सुधारों, तय लक्ष्यों और स्पष्ट परिणामों से जोड़ा जाएगा। परियोजनाओं की निगरानी आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के डिजिटल पोर्टल के माध्यम से पेपरलेस तरीके से की जाएगी।
परियोजनाओं का मूल्यांकन उनके परिवर्तनकारी प्रभाव, निजी निवेश आकर्षित करने की क्षमता, रोजगार सृजन, सामाजिक समावेशन, सुरक्षा, स्वच्छता और जलवायु स्थिरता जैसे मानकों पर किया जाएगा।
