बिहार के वैशाली जिले में महिलाओं ने इस वर्ष होली का पर्व पारंपरिक उत्साह, उमंग और उल्लास के साथ मनाया। गांवों से लेकर शहरी इलाकों तक महिलाएं समूह बनाकर एकत्रित हुईं और प्राकृतिक रंगों के साथ होली खेलते हुए सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत किया। रंगों की छटा और लोकगीतों की मधुर धुनों ने पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया।
होली के अवसर पर भगवान शिव, श्रीकृष्ण और राधा पर आधारित पारंपरिक फाग गीत गाए गए। ढोलक और मंजीरे की थाप पर महिलाएं सामूहिक रूप से झूमती नजर आईं। फाग गीतों की गूंज से माहौल भक्तिमय और आनंदमय हो उठा। इस आयोजन ने न केवल त्योहार की रौनक बढ़ाई, बल्कि सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक समृद्धि का भी परिचय दिया।
विशेष बात यह रही कि महिलाओं ने रासायनिक रंगों से दूरी बनाते हुए फूलों, अबीर और गुलाल से होली खेली। उनके इस प्रयास के जरिए पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता का संदेश भी दिया गया। प्राकृतिक रंगों के उपयोग से सुरक्षित और स्वास्थ्यवर्धक होली मनाने की प्रेरणा समाज को मिली।
महिलाओं की यह पहल पारंपरिक संस्कृति को सहेजने के साथ-साथ नई पीढ़ी को भी अपने रीति-रिवाजों से जोड़ने का कार्य कर रही है। वैशाली में मनाई गई यह होली सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक विरासत और पर्यावरण जागरूकता का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आई।
