राज्यसभा में आज राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर शुरू हुई चर्चा का समापन हुआ। इस विशेष चर्चा की शुरुआत मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने की थी, जिसके बाद सदन के कई सदस्यों ने अपने विचार रखे।
चर्चा का निष्कर्ष प्रस्तुत करते हुए सदन के नेता और केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने कहा कि वंदे मातरम् सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि ऐसा मंत्र है जो राष्ट्र की आत्मा को जागृत करता है और देश की संस्कृति से जुड़ने का अवसर देता है। उन्होंने कहा कि यह गीत हर नागरिक के लिए भावनात्मक प्रेरणा का स्रोत रहा है और देश को एकता के साथ आगे बढ़ाने का संकल्प देता है।
नड्डा ने अपने वक्तव्य में यह भी कहा कि वंदे मातरम् ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अनेक ऐतिहासिक क्षणों को देखा है। स्वतंत्रता आंदोलन के समय इस गीत ने देशभर में अलख जगाई और लोगों में ऊर्जा व उत्साह भरने का काम किया।
कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए नड्डा ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की छवि खराब करना नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल इतिहास को सही रूप में प्रस्तुत करना है, न कि किसी नेता को नीचा दिखाना।
नड्डा ने आरोप लगाया कि 1937 में नेहरू की अध्यक्षता के दौरान, सांप्रदायिक दबाव के चलते वंदे मातरम् के पवित्र गीत की कुछ कड़ियों को हटाया गया। उनका कहना था कि स्वतंत्रता के बाद भी इस राष्ट्रीय गीत को वह सम्मान नहीं मिला, जिसकी वह पात्र था, और इसके लिए तत्कालीन सरकार जिम्मेदार थी।
उन्होंने कहा कि पिछले दो दिनों में राज्यसभा के 80 से अधिक सदस्यों ने इस विषय पर चर्चा में हिस्सा लिया, जो इस मुद्दे की प्रासंगिकता को दर्शाता है। नड्डा के अनुसार, इस चर्चा से नई पीढ़ी — जिसने स्वतंत्रता संग्राम के संघर्षों को प्रत्यक्ष रूप से नहीं देखा — वंदे मातरम् के महत्व को और गहराई से समझ सकेगी।
