वैज्ञानिकों ने एक चौंकाने वाली खोज की है कि विटामिन A से बनने वाला एक खास तत्व शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) को कमजोर कर सकता है। इससे कैंसर ट्यूमर शरीर की सुरक्षा प्रणाली से बचकर बढ़ सकते हैं और कैंसर वैक्सीन का असर भी कम हो सकता है।
हालांकि अब वैज्ञानिकों ने एक नई प्रयोगात्मक दवा तैयार की है, जो इस प्रक्रिया को रोक सकती है। शुरुआती लैब और जानवरों पर हुए परीक्षणों में इस दवा ने इम्यून सिस्टम को मजबूत किया और कैंसर की ग्रोथ को धीमा किया।
यह रिसर्च प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से जुड़े लुडविग इंस्टीट्यूट फॉर कैंसर रिसर्च के वैज्ञानिकों ने की है।
क्या है विटामिन A का यह तत्व
वैज्ञानिकों ने पाया कि ऑल-ट्रांस रेटिनोइक एसिड नाम का एक मॉलिक्यूल, जो विटामिन A से बनता है, कैंसर से लड़ने वाली प्राकृतिक प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को कमजोर कर सकता है।
रेटिनोइड्स (विटामिन A से बने तत्व) लंबे समय से वैज्ञानिकों के बीच चर्चा का विषय रहे हैं क्योंकि इनके फायदे और नुकसान दोनों देखे गए हैं। नई रिसर्च से इस विवाद को समझने में मदद मिली है।
कैसे कमजोर होती है कैंसर वैक्सीन
रिसर्च में पाया गया कि डेंड्रिटिक सेल्स (इम्यून सिस्टम की महत्वपूर्ण कोशिकाएं) जब रेटिनोइक एसिड बनाती हैं, तो ये ट्यूमर के प्रति सहनशीलता बढ़ा देती हैं।
इससे डेंड्रिटिक सेल वैक्सीन का असर कम हो जाता है। ये वैक्सीन शरीर को कैंसर कोशिकाओं को पहचानने और खत्म करने की ट्रेनिंग देती है।
वैज्ञानिकों ने KyA33 नाम की एक दवा बनाई, जो रेटिनोइक एसिड बनने की प्रक्रिया को रोकती है। इससे वैक्सीन ज्यादा असरदार हुई।
नई दवा कैसे काम करती है
यह दवा ALDH1a2 और ALDH1a3 नाम के एंजाइम को ब्लॉक करती है। ये एंजाइम रेटिनोइक एसिड बनाते हैं और कई कैंसर में ज्यादा मात्रा में पाए जाते हैं।
जब इस प्रक्रिया को रोका गया तो
- डेंड्रिटिक सेल्स ज्यादा मजबूत बने
- इम्यून सिस्टम ने कैंसर पर ज्यादा हमला किया
- ट्यूमर की ग्रोथ धीमी हुई
विटामिन A और कैंसर का विरोधाभास
लैब में देखा गया है कि रेटिनोइक एसिड कभी-कभी कैंसर सेल्स की ग्रोथ रोक सकता है।
लेकिन बड़े क्लीनिकल ट्रायल्स में पाया गया कि ज्यादा विटामिन A लेने से
- कैंसर का खतरा बढ़ सकता है
- हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ सकता है
- मृत्यु दर बढ़ सकती है
नई रिसर्च बताती है कि कैंसर सेल्स रेटिनोइक एसिड बनाते हैं लेकिन खुद उसके असर से बच जाते हैं, जबकि यह इम्यून सिस्टम को कमजोर कर देता है।
भविष्य में क्या फायदा होगा
अगर यह दवा इंसानों में सफल होती है तो इससे
- कैंसर इम्यूनोथेरेपी मजबूत हो सकती है
- कैंसर वैक्सीन ज्यादा प्रभावी बन सकती है
- डायबिटीज और हार्ट डिजीज में भी नई दवाएं बन सकती हैं
वैज्ञानिकों ने Kayothera नाम की बायोटेक कंपनी शुरू की है, जो इस दवा को क्लीनिकल ट्रायल तक ले जाने पर काम कर रही है।
मेडिकल क्षेत्र पर असर
इस खोज से कैंसर इलाज में बड़ा बदलाव आ सकता है क्योंकि यह सीधे इम्यून सिस्टम को मजबूत करने पर काम करता है, न कि सिर्फ कैंसर सेल्स को मारने पर।
