आज ‘मेक इन इंडिया’ पहल के सफल 12 वर्ष पूरे हो गए हैं। वर्ष 2014 में आज ही के दिन भारत को विनिर्माण, डिजाइन और नवाचार का वैश्विक केंद्र बनाने के विजन के साथ इस महत्वाकांक्षी पहल की शुरुआत की गई थी। इस योजना ने विभिन्न उद्योगों में उत्पादन, निवेश और क्षमताओं का विस्तार करके भारत के विनिर्माण परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है।
मेक इन इंडिया 2.0 और प्रमुख क्षेत्र
आकाशवाणी संवाददाता के अनुसार, ‘मेक इन इंडिया’ ने भारतीय विनिर्माण यात्रा में व्यवसायियों और निवेशकों के लिए नए अवसर खोले हैं। इस पहल का विस्तार ‘मेक इन इंडिया 2.0’ के तहत किया गया है, जिसके अंतर्गत अब 27 प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है—इनमें 15 विनिर्माण क्षेत्र और 12 सेवा क्षेत्र शामिल हैं।
इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल उत्पादन में अभूतपूर्व उछाल
‘न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन’ के सिद्धांत पर आधारित इस पहल ने निवेश को सुगम बनाने, नवाचार को बढ़ावा देने और विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर दिया है।
- इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन: वित्त वर्ष 2014-15 के ₹1.9 लाख करोड़ से लगभग 7 गुना बढ़कर वर्ष 2025-26 में ₹13 लाख करोड़ के पार पहुंच गया।
- मोबाइल निर्माण: इसी अवधि में मोबाइल फोन का उत्पादन 33 गुना बढ़कर ₹18 हजार करोड़ से ₹6.27 लाख करोड़ हो गया।
भारतीय रेलवे और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता
रेलवे और रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में भी मेक इन इंडिया का असर साफ देखा गया है:
- रेलवे कोच निर्माण: वर्ष 2014 से 2024 के दौरान भारतीय रेलवे ने लगभग 55 हजार डिब्बों का निर्माण किया। वार्षिक औसत कोच उत्पादन 2004-14 के 3,300 से बढ़कर 2014-24 के दौरान 5,000 से अधिक हो गया। वित्त वर्ष 2025-26 में ही 6,600 से अधिक एलएचबी (LHB) कोच बनाए गए।
- रक्षा उत्पादन: देश का स्वदेशी रक्षा उत्पादन वित्त वर्ष 2014-15 के ₹46,429 करोड़ से लगभग चार गुना बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड ₹1.78 लाख करोड़ के स्तर पर पहुंच गया।
अब यह पहल केवल अधिक सामान बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत में विश्वस्तरीय विनिर्माण के लिए आवश्यक कौशल, तकनीक और क्षमता निर्माण पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
