पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार ने आज कारोबार की शुरुआत भारी गिरावट के साथ की। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी शुरुआती कारोबार में लगभग एक-एक प्रतिशत टूट गए, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई।
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 800 से अधिक अंकों की गिरावट के साथ 73,422 पर खुला। यह पिछले बंद स्तर की तुलना में 1.11 प्रतिशत की कमजोरी दर्शाता है। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 286 अंकों या 1.22 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,081 पर कारोबार शुरू करता दिखाई दिया।
बाजार में बिकवाली का दबाव लगभग सभी प्रमुख क्षेत्रों में देखने को मिला। रियल्टी, मेटल, ऑटोमोबाइल और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनियों के शेयरों में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई। रियल्टी सेक्टर करीब 2 प्रतिशत तक लुढ़क गया, जबकि मेटल, ऑटो और आईटी सूचकांकों में 1 प्रतिशत से अधिक की कमजोरी देखने को मिली। निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाते हुए कई क्षेत्रों में मुनाफावसूली की।
गिरावट केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि व्यापक बाजार भी दबाव में दिखाई दिया। निफ्टी मिडकैप 100, मिडकैप 150 और स्मॉलकैप सूचकांकों में भी लगभग 1 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। इससे स्पष्ट है कि बाजार में निवेशकों का रुझान सतर्क बना हुआ है और वे वैश्विक घटनाक्रमों पर करीबी नजर रख रहे हैं।
इस बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। वैश्विक मानक ब्रेंट क्रूड का भाव लगभग 4 प्रतिशत बढ़कर 96.90 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। वहीं अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड 4.64 प्रतिशत की तेजी के साथ 94.75 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखाई दिया। तेल की बढ़ती कीमतें भारत जैसे आयातक देशों के लिए चिंता का विषय मानी जाती हैं, क्योंकि इससे महंगाई और व्यापार घाटे पर दबाव बढ़ सकता है।
एशियाई बाजारों में भी कमजोरी का माहौल देखने को मिला। जापान का निक्केई सूचकांक लगभग 4 प्रतिशत तक टूट गया, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी 5 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। हांगकांग का हैंगसेंग सूचकांक भी करीब 1 प्रतिशत नीचे रहा। एशियाई बाजारों में आई इस व्यापक गिरावट का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ तौर पर दिखाई दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी निकट भविष्य में बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक रहेंगे। निवेशकों की नजर अब वैश्विक घटनाक्रमों, कच्चे तेल की कीमतों और प्रमुख केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर बनी रहेगी।
