केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था, जो वर्तमान में लगभग 9 अरब डॉलर के स्तर पर है, अगले सात से आठ वर्षों में बढ़कर करीब 45 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है। उन्होंने यह जानकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के 12 वर्षों की उपलब्धियों पर मीडिया से बातचीत के दौरान दी।
डॉ. सिंह ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश में जो सबसे बड़ा बदलाव देखने को मिला है, वह लोगों की सोच और दृष्टिकोण में आया परिवर्तन है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में अवसरों को अधिक लोकतांत्रिक और पारदर्शी बनाया गया है, जिससे देश के दूरदराज़ क्षेत्रों और छोटे शहरों के युवाओं को भी आगे बढ़ने का अवसर मिला है।
उन्होंने बताया कि कुछ वर्ष पहले तक भारत में अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़े स्टार्टअप्स की संख्या एकल अंक में थी, लेकिन आज यह संख्या बढ़कर लगभग 400 तक पहुंच गई है। यह वृद्धि दर्शाती है कि देश में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में तेजी से विकास हो रहा है। सरकार द्वारा निजी क्षेत्र के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र को खोलने और नई नीतियों को लागू करने से उद्यमियों और युवा नवप्रवर्तकों को नई संभावनाएं मिली हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि तकनीक, पारदर्शिता और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा के माध्यम से अवसरों का विस्तार हुआ है। इसका प्रभाव देश की सिविल सेवा परीक्षाओं में भी दिखाई देता है, जहां अब बड़ी संख्या में सफल अभ्यर्थी छोटे शहरों और गैर-महानगरीय क्षेत्रों से सामने आ रहे हैं। उन्होंने इसे देश में अवसरों के समान वितरण का सकारात्मक संकेत बताया।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट सफल लैंडिंग ने देश में विज्ञान और अंतरिक्ष अनुसंधान के प्रति लोगों की रुचि को और मजबूत किया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने न केवल भारत की वैज्ञानिक क्षमता को वैश्विक स्तर पर स्थापित किया, बल्कि युवाओं को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए भी प्रेरित किया है।
उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की बढ़ती भागीदारी, नवाचार आधारित स्टार्टअप संस्कृति और वैज्ञानिक उपलब्धियां आने वाले वर्षों में देश की आर्थिक प्रगति को नई गति देंगी। सरकार का लक्ष्य भारत को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में विश्व के अग्रणी देशों में शामिल करना है, जिसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
