बहुत से लोग मानते हैं कि रात में जब कुत्ते रोते या हूकते हैं, तो यह किसी अशुभ घटना या भूत-प्रेत की मौजूदगी का संकेत होता है। लेकिन वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो इसका कारण पूरी तरह अलग है। असल में कुत्तों के रात में रोने के पीछे उनकी असाधारण संवेदनशीलता और सुनने की क्षमता जिम्मेदार होती है।
कुत्तों के शरीर में कई ऐसे प्राकृतिक सेंसर होते हैं जो उन्हें इंसानों से कहीं ज्यादा संवेदनशील बनाते हैं। उदाहरण के लिए, उनके पंजे जमीन में होने वाली हलचल को महसूस कर सकते हैं। अगर जमीन के भीतर हल्की कंपन, भू-संरचनात्मक गतिविधि या भूकंप जैसी स्थिति बन रही हो, तो कुत्तों को उसका आभास इंसानों से पहले हो सकता है।
दूसरी बड़ी वजह है उनकी सुनने की अद्भुत क्षमता। चूहे आपस में अल्ट्रासोनिक फ्रीक्वेंसी पर संवाद करते हैं, जो लगभग 8,000 से 10,000 हर्ट्ज या उससे अधिक हो सकती है। इंसान इन ध्वनियों को नहीं सुन पाते, लेकिन कुत्ते इन्हें आसानी से सुन सकते हैं। रात के समय जब कई चूहे सक्रिय होकर आपस में संवाद करते हैं, तो यह आवाजें कुत्तों के लिए लगातार सुनाई देती रहती हैं।
तीसरा कारण चमगादड़ हैं। चमगादड़ रात में उड़ते समय इकोलोकेशन (Echolocation) का उपयोग करते हैं। वे लगातार अल्ट्रासोनिक तरंगें छोड़ते हैं, जो आसपास की वस्तुओं से टकराकर वापस लौटती हैं और इसी से उन्हें रास्ता दिखाई देता है। ये ध्वनियां इंसानों को सुनाई नहीं देतीं, लेकिन कुत्ते इन्हें महसूस कर सकते हैं।
इसके अलावा, दूर कहीं मौजूद दूसरे कुत्तों की आवाजें भी उनके लिए महत्वपूर्ण होती हैं। कुत्ते एक-दूसरे से ध्वनि के माध्यम से संवाद करते हैं। यदि दूर किसी इलाके में कोई कुत्ता हूक रहा हो, तो अन्य कुत्ते भी उसकी प्रतिक्रिया में आवाज निकाल सकते हैं। यह उनके सामाजिक और क्षेत्रीय व्यवहार का हिस्सा है।
जब एक साथ जमीन की हलचल, चूहों की आवाजें, चमगादड़ों की अल्ट्रासोनिक तरंगें और दूसरे कुत्तों के संकेत कुत्ते तक पहुंचते हैं, तो उनका दिमाग लगातार इन संकेतों को प्रोसेस करता रहता है। इससे वे बेचैन, तनावग्रस्त या परेशान हो सकते हैं।
वैज्ञानिकों के अनुसार, कुत्तों का व्यवहार उनके पूर्वज भेड़ियों से जुड़ा हुआ है। भेड़िए रात में एक-दूसरे से संपर्क बनाए रखने के लिए हूकते थे। यही प्रवृत्ति आज भी कुत्तों में मौजूद है। इसलिए जब वे तनाव, बेचैनी या बाहरी संकेतों को महसूस करते हैं, तो रात में सिर ऊपर उठाकर हूकने लगते हैं।
इसलिए अगली बार जब रात में किसी कुत्ते के रोने की आवाज सुनें, तो इसे अंधविश्वास से जोड़ने के बजाय वैज्ञानिक नजरिए से समझने की कोशिश करें। अधिक संभावना यही है कि कुत्ता उन आवाजों और संकेतों पर प्रतिक्रिया दे रहा है, जिन्हें इंसान महसूस ही नहीं कर पाते।
