खगोल विज्ञान (Astronomy) और अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में नासा एक नया इतिहास रचने जा रहा है। नासा का नया ‘नैन्सी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप’ (Nancy Grace Roman Space Telescope) अंतरिक्ष में लॉन्च होने के लिए पूरी तरह तैयार है। इसे फ्लोरिडा स्थित केनेडी स्पेस सेंटर से स्पेसएक्स के फाल्कन हैवी रॉकेट (Falcon Heavy Rocket) के माध्यम से लॉन्च करने की योजना बनाई गई है।
यह टेलीस्कोप हबल और जेम्स वेब का रिप्लेसमेंट (विकल्प) नहीं है, बल्कि अंतरिक्ष विज्ञान में एक नई क्रांति है जो ब्रह्मांड के विशाल हिस्सों को एक साथ स्कैन करने की क्षमता रखता है।
क्यों खास है ‘रोमन स्पेस टेलीस्कोप’?
- हबल से 100 गुना बड़ा फील्ड ऑफ व्यू: रोमन का प्राइमरी मिरर 2.4 मीटर का है (जो हबल के बराबर है), लेकिन इसका वाइड-फील्ड कैमरा इसे अद्भुत क्षमता देता है। यह एक ही तस्वीर में हबल टेलीस्कोप से 100 गुना ज्यादा आसमान देख सकता है।
- 1000 गुना तेज सर्वे: यह हबल की तुलना में आसमान का सर्वे लगभग 1000 गुना तेजी से पूरा कर सकता है। जहां हबल एक शक्तिशाली ज़ूम लेंस की तरह है, वहीं रोमन एक विशाल वाइड-एंगल कैमरे की तरह काम करेगा।
- मदर ऑफ हबल के नाम पर नामकरण: इस टेलीस्कोप का नाम नासा की पहली मुख्य खगोल वैज्ञानिक नैन्सी ग्रेस रोमन के नाम पर रखा गया है, जिन्हें ‘मदर ऑफ हबल’ भी कहा जाता है।
तीन महा-मिशन: डार्क एनर्जी, डार्क मैटर और एक्सोप्लैनेट्स
रोमन टेलीस्कोप का मुख्य उद्देश्य केवल सुंदर तस्वीरें लेना नहीं, बल्कि ब्रह्मांड के सबसे बड़े अनसुलझे सवालों के जवाब तलाशना है:
- डार्क एनर्जी (Dark Energy) का रहस्य: ब्रह्मांड तेजी से क्यों फैल रहा है? वैज्ञानिक मानते हैं कि ब्रह्मांड के कुल ऊर्जा बजट का लगभग 70% हिस्सा डार्क एनर्जी है। रोमन वीक ग्रेविटेशनल लेंसिंग, गैलेक्सी क्लस्टरिंग और सुपरनोवा के अध्ययन से इसके प्रभाव को समझेगा।
- डार्क मैटर (Dark Matter) का 3D मैप: डार्क मैटर दिखाई नहीं देता, लेकिन इसका गुरुत्वाकर्षण प्रभाव साफ दिखता है। रोमन इसके ग्रेविटेशनल पदचिह्नों (Footprints) को मैप करके ब्रह्मांड का एक विस्तृत 3D नक्शा तैयार करेगा।
- नए एक्सोप्लैनेट्स (Exoplanets) की खोज: ग्रेविटेशनल माइक्रोलेंसिंग (Gravitational Microlensing) तकनीक का उपयोग करके रोमन हमारी मिल्की वे गैलेक्सी में उन ग्रहों की खोज करेगा जो अपने तारों से ठीक उतनी ही दूरी पर हैं जितनी दूरी पर पृथ्वी या बृहस्पति सूर्य से हैं।
हबल, जेम्स वेब और रोमन में मुख्य अंतर
| टेलीस्कोप | मुख्य विशेषता | कार्य |
| हबल (Hubble) | विस्तृत और सुंदर तस्वीरें | ब्रह्मांड की गहराई और विशिष्ट क्षेत्रों की डिटेलिंग |
| जेम्स वेब (JWST) | अत्यधिक संवेदनशील इन्फ्रारेड | शुरुआती ब्रह्मांड और बेहद दूर की आकाशगंगाओं को देखना |
| रोमन (Roman) | विशाल क्षेत्र का तेज़ी से सर्वे | अरबों कॉस्मिक ऑब्जेक्ट्स का 3D मैप और सांख्यिकीय अध्ययन |
लॉन्च के बाद क्या होगा? (L2 ऑर्बिट का सफर)
लॉन्च के बाद रोमन टेलीस्कोप को सन-अर्थ L2 (Lagrange Point 2) रीजन की ओर भेजा जाएगा, जो पृथ्वी से लगभग 10 लाख मील (1.5 मिलियन किमी) दूर है। यह वही स्थान है जहाँ जेम्स वेब टेलीस्कोप भी स्थित है। L2 बिंदु पर टेलीस्कोप को सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा की तेज रोशनी व गर्मी से बेहतर सुरक्षा मिलती है।
रोमन टेलीस्कोप में धूल और गैस के बादलों के पार देखने के लिए इन्फ्रारेड तकनीक के साथ-साथ एक कोरोनाग्राफ (Coronagraph) इंस्ट्रूमेंट भी लगा है, जो तारों की तेज रोशनी को रोककर उनके आसपास छिपे धुंधले ग्रहों की तस्वीरें लेने में मदद करेगा।
यह मिशन लॉन्च होते ही तुरंत सभी सवालों के जवाब नहीं देगा, लेकिन आने वाले दशकों के लिए यह खगोल विज्ञान की नींव को पूरी तरह बदल देगा।
