दुनियाभर में प्लास्टिक कचरा एक गंभीर समस्या बन चुका है। हम रोज़मर्रा की जिंदगी में पानी की बोतलों से लेकर प्लास्टिक बैग्स तक कई चीजों का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन जब इन्हें फेंक दिया जाता है, तो इन्हें रीसाइकिल (Recycle) करना बेहद मुश्किल हो जाता है।
अक्सर अलग-अलग तरह के प्लास्टिक को छांटने में बहुत ज़्यादा खर्च और समय लगता है। यही वजह है कि दुनिया का सिर्फ 9% प्लास्टिक ही रीसाइकिल हो पाता है। बाकी का 79% कचरा डंपिंग यार्ड (Landfills) में जमा हो जाता है और 12% को जला दिया जाता है—जिससे हवा में खतरनाक कार्बन डाइऑक्साइड फैलती है।
लेकिन अब वैज्ञानिकों ने एक ऐसी नई तकनीक खोज निकाली है जो इस दोहरी समस्या का हल निकाल सकती है।
क्या है यह नई खोज?
यूसीएलए (UCLA) और दक्षिण कोरिया की ईव्हा वुमेन्स यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी रासायनिक प्रक्रिया विकसित की है, जो तीन सबसे आम प्लास्टिक कचरों को मिलाकर सीधे शुद्ध हाइड्रोजन ईंधन में बदल सकती है।
इस प्रक्रिया की सबसे बड़ी खूबी यह है कि:
- प्लास्टिक को अलग-अलग छांटने की जरूरत नहीं है: पेट (PET), पॉलीइथिलीन (PE) और पॉलीप्रोपिलीन (PP) जैसे प्लास्टिक को एक साथ प्रोसेस किया जा सकता है।
- कम तापमान पर काम: यह पारंपरिक तरीकों के मुकाबले 300 से 400 डिग्री सेल्सियस कम तापमान पर काम करती है, जिससे ऊर्जा की बड़ी बचत होती है।
- 90% से ज़्यादा शुद्ध हाइड्रोजन: इस प्रक्रिया से 90% से अधिक शुद्धता वाला हाइड्रोजन ईंधन मिलता है।
हवा में ज़हरीला धुआँ नहीं फैलेगा
पारंपरिक रूप से कचरे से गैस बनाने की प्रक्रिया (Gasification) में भारी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) हवा में घुल जाती है। लेकिन इस नई तकनीक—अल्कलाइन थर्मल ट्रीटमेंट (ATT)—में सोडियम हाइड्रोक्साइड का इस्तेमाल किया जाता है।
यह रसायन प्लास्टिक के कार्बन को हवा में मिलने से रोकता है और उसे ठोस ‘सोडियम कार्बोनेट’ (एक प्रकार का खनिज) में बदल देता है। इस प्रक्रिया में 75% से अधिक कार्बन ठोस या तरल रूप में सुरक्षित कर लिया जाता है, जिससे पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुँचता।
मुश्किल प्लास्टिक को कैसे बनाया आसान?
PET प्लास्टिक आसानी से टूट जाता है, लेकिन पॉलीइथिलीन (PE) और पॉलीप्रोपिलीन (PP) आसानी से केमिकल से रिएक्शन नहीं करते। वैज्ञानिकों ने इस समस्या का हल ‘थर्मल ऑक्सीडेशन प्रिट्रीटमेंट’ से निकाला।
मुख्य प्रक्रिया से पहले, प्लास्टिक को हल्की हवा की मौजूदगी में गर्म किया जाता है। इससे प्लास्टिक के मॉलिक्यूल्स में ऑक्सीजन जुड़ जाती है, जिससे वे रासायनिक रूप से सक्रिय हो जाते हैं और अल्कलाइन ट्रीटमेंट में आसानी से टूट जाते हैं।
भविष्य की राह
शोधकर्ताओं का कहना है कि यह तकनीक ‘सर्कुलर इकोनॉमी’ (कचरे से नई चीज़ें बनाने) और ‘हाइड्रोजन ऊर्जा’ दोनों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है।
फिलहाल यह परीक्षण प्रयोगशाला (Lab) के स्तर पर सफल रहा है। बड़े पैमाने पर उद्योगों में इसका व्यावसायिक उपयोग करने से पहले अभी और रिसर्च और टेस्टिंग की आवश्यकता है।
क्रेडिट: यह रिपोर्ट Proceedings of the National Academy of Sciences (PNAS) में प्रकाशित वैज्ञानिक शोध पत्र और UCLA Samueli School of Engineering द्वारा जारी जानकारी के आधार पर तैयार की गई है।
