वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2026) में भारत के मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) वाले साझेदार देशों को निर्यात में जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है। तंजानिया के समाचार पत्र ‘द गार्जियन’ में प्रकाशित एक लेख और वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, भारत का बढ़ता व्यापार समझौतों का नेटवर्क बाजार पहुंच के लाभों को वास्तविक निर्यात वृद्धि में तेजी से बदल रहा है।
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल निर्यात रिकॉर्ड 863.1 अरब डॉलर पर पहुंचा था, जिसमें 441.8 अरब डॉलर का वस्तु निर्यात और 421.3 अरब डॉलर का सेवा निर्यात शामिल था। ताजा आंकड़े दर्शाते हैं कि भारत अपनी निर्यात मात्रा बढ़ाने के साथ-साथ तरजीही व्यापार व्यवस्थाओं का भी प्रभावी इस्तेमाल कर रहा है।
प्रमुख देशों को निर्यात के आंकड़े (अप्रैल-जून 2026):
- सिंगापुर: 101.2% की वृद्धि के साथ $6.52 अरब (पिछले साल $3.24 अरब)।
- श्रीलंका: 123.8% की भारी उछाल के साथ $2.35 अरब (पिछले साल $1.05 अरब)।
- आसियान (ASEAN) क्षेत्र: 61.6% बढ़कर $14.61 अरब (पिछले साल $9.04 अरब)।
- मलेशिया: 75.2% बढ़कर $2.54 अरब।
- ऑस्ट्रेलिया: 25.2% बढ़कर $2.68 अरब।
- दक्षिण कोरिया: 22.6% बढ़कर $1.95 अरब।
- जापान: 22.4% बढ़कर $1.75 अरब।
- ओमान: 26.4% बढ़कर $1.39 अरब।
- नेपाल: 18.1% बढ़कर $2.28 अरब।
- भूटान और थाईलैंड: क्रमशः 16.1% और 6% की वृद्धि।
हाल के प्रमुख व्यापार समझौतों में भारत-यूएई सीईपीए, भारत-ऑस्ट्रेलिया ईसीटीए, भारत-ईएफटीए टीईपीए, भारत-ओमान सीईपीए और भारत-यूके सीईटीए शामिल हैं। इसके अलावा, न्यूजीलैंड के साथ एफटीए लागू होने की प्रक्रिया में है और यूरोपीय संघ के साथ बातचीत जनवरी 2026 में पूरी हो चुकी है।
