प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। पीएम मोदी ने राष्ट्र निर्माण की मजबूत नींव के रूप में उनकी अंत्योदय विचारधारा और समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के उत्थान के संकल्प को रेखांकित किया। उन्होंने सभी देशवासियों से पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के विचारों एवं आदर्शों को आत्मसात कर सामाजिक तथा राष्ट्रीय दायित्वों को निष्ठापूर्वक पूरा करने का आह्वान किया।
इस विशेष अवसर पर प्रधानमंत्री ने सफलता, प्रयास और नवाचार के महत्व को दर्शाने वाला एक प्रेरक संस्कृत सुभाषितम् भी साझा किया।
प्रधानमंत्री का संदेश (‘एक्स’ पर):
“राष्ट्रसेवा के सच्चे साधक पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी को उनकी जयंती पर सादर नमन। उन्होंने समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के उत्थान को राष्ट्र निर्माण का आधार माना और अंत्योदय की एक ऐसी विचारधारा दी, जिससे आज भी जनकल्याण की अद्भुत प्रेरणा मिलती है। आइए, इस विशेष अवसर पर उनके विचारों और आदर्शों को आत्मसात कर सामाजिक और राष्ट्रीय दायित्वों को पूरा करने का संकल्प दोहराएं।
यथा यथा प्रयत्नः स्याद्भवेदाशु फलं तथा।
इति पौरुषमेवास्ति दैवमस्तु तदेव च॥“
मेहनत और संकल्प से ही मिलती है सफलता
शेयर किए गए सुभाषितम् का भावार्थ स्पष्ट करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी व्यक्ति का प्रयास और लगन जितनी अधिक होती है, सफलता उतनी ही जल्दी प्राप्त होती है। नवाचार भी निरंतर प्रयास पर ही आधारित होता है। इसलिए, यह केवल भाग्य नहीं बल्कि समर्पित कार्य, साहस और नए विचारों को धरातल पर उतारने का दृढ़ संकल्प ही सफलता एवं नवाचार का मार्ग प्रशस्त करता है।
