भारत और रूस के बीच गुरुवार को नई दिल्ली में रक्षा सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण वार्ता हुई। दोनों देशों ने मौजूदा सैन्य-तकनीकी सहयोग की प्रगति की समीक्षा करने के साथ रक्षा उपकरणों के संयुक्त उत्पादन और संयुक्त विकास की नई संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की।
यह बैठक भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग के सैन्य-तकनीकी सहयोग और रक्षा उद्योग से जुड़े 24वें कार्य समूह की थी। बैठक को दोनों देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही रणनीतिक रक्षा साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
वरिष्ठ अधिकारियों ने की बैठक की सह-अध्यक्षता
नई दिल्ली में आयोजित बैठक के उद्घाटन सत्र में भारत और रूस के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक की सह-अध्यक्षता भारत की ओर से रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार और रूस की ओर से सैन्य-तकनीकी सहयोग के लिए संघीय सेवा के प्रथम उप निदेशक आंद्रेई ए. बोयत्सोव ने की।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, दोनों पक्षों ने भारत और रूस के बीच जारी सैन्य-तकनीकी सहयोग की स्थिति और अब तक हुई प्रगति की समीक्षा की। इसके साथ ही रक्षा क्षेत्र में संयुक्त उत्पादन और संयुक्त विकास से जुड़ी नई पहलों पर विशेष ध्यान दिया गया।
रक्षा उद्योग में नए सहयोग पर जोर
बैठक का उद्देश्य दोनों देशों के बीच रक्षा साझेदारी को और मजबूत करना तथा सैन्य-तकनीकी सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करना रहा। भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग कई दशकों से दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी का महत्वपूर्ण आधार रहा है।
समय के साथ यह सहयोग केवल रक्षा उपकरणों की खरीद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संयुक्त अनुसंधान, तकनीकी विकास, उत्पादन और रखरखाव जैसे क्षेत्रों तक विस्तारित हुआ है।
दोनों देशों के बीच सैन्य-तकनीकी सहयोग के लिए 2021 से 2031 तक की अवधि का समझौता भी लागू है। इसके तहत संयुक्त अनुसंधान, विकास, उत्पादन और रक्षा उपकरणों के रखरखाव से जुड़े सहयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है।
ब्रह्मोस से एके-203 तक कई प्रमुख परियोजनाएं
भारत-रूस रक्षा सहयोग के तहत ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली, सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान, टी-90 टैंक और एके-203 राइफल जैसी परियोजनाएं महत्वपूर्ण उदाहरण हैं। इन परियोजनाओं ने दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग और भारत में रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने में भूमिका निभाई है।
इससे पहले 29 अक्टूबर 2025 को रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार के नेतृत्व में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने मॉस्को में कार्य समूह की 23वीं बैठक में हिस्सा लिया था।
अब नई दिल्ली में हुई 24वीं बैठक के दौरान दोनों देशों ने सैन्य-तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाने के साथ रक्षा उद्योग में साझा विकास और संयुक्त उत्पादन की नई संभावनाओं पर अपना ध्यान केंद्रित किया।
