भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने डेट सिक्योरिटीज में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए ‘क्रेडिट रिस्क-ओ-मीटर’ को अनिवार्य कर दिया है। इसका उद्देश्य निवेश से पहले किसी डेट सिक्योरिटी से जुड़े क्रेडिट जोखिम को समझने में निवेशकों की मदद करना है।
सेबी के नए प्रावधान के तहत रंग-आधारित जोखिम संकेतक को जारीकर्ताओं और ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म प्रदाताओं (OBPPs) की ओर से जारी किए जाने वाले विभिन्न दस्तावेजों और विज्ञापनों में प्रदर्शित करना होगा।
इन जगहों पर दिखाना होगा जोखिम संकेतक
‘क्रेडिट रिस्क-ओ-मीटर’ को ऑफर दस्तावेज, संक्षिप्त प्रॉस्पेक्टस, निजी प्लेसमेंट मेमोरेंडम और विज्ञापनों में प्रमुखता से प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म के वेब और मोबाइल प्लेटफॉर्म पर भी यह जोखिम संकेतक उपलब्ध कराना होगा।
सेबी के अनुसार, रंग-आधारित यह संकेतक निवेशकों को डेट सिक्योरिटीज से जुड़े क्रेडिट जोखिम की स्थिति को आसानी से समझने में मदद करेगा। इससे निवेशक उपलब्ध जानकारी के आधार पर अधिक सोच-समझकर निवेश संबंधी निर्णय ले सकेंगे।
45 दिन बाद लागू होंगे नए प्रावधान
सेबी ने बताया कि नए प्रावधान सर्कुलर जारी होने की तारीख से 45 दिन बाद प्रभावी होंगे। नियमों को लागू करने के लिए स्टॉक एक्सचेंजों और डिपॉजिटरीज को आवश्यक सिस्टम और प्रक्रियाएं तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
‘क्रेडिट रिस्क-ओ-मीटर’ की अनिवार्यता से डेट बाजार में जोखिम संबंधी जानकारी को अधिक स्पष्ट और आसानी से समझने योग्य बनाने की दिशा में कदम उठाया गया है।
