प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक सेवा में 25 वर्ष पूरे कर लिए हैं, जो ‘जन सेवा से देश सेवा’ के मंत्र और निरंतर प्रतिबद्धता की एक ऐतिहासिक यात्रा रही है। सेवा और सुशासन की इसी दृष्टि से प्रेरित होकर सरकार 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए लगातार काम कर रही है। समावेशी विकास और सामाजिक सशक्तिकरण के इसी विजन का एक बड़ा प्रभाव देश की विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) नीति में देखने को मिला है।
बीते एक दशक में भारत की एफडीआई नीति में कई बड़े सुधार किए गए हैं, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में विदेशी निवेश को आकर्षित करने के नियमों को उदार बनाया गया है। सरकार ने रक्षा, दूरसंचार, बीमा और अंतरिक्ष जैसे प्रमुख क्षेत्रों में एफडीआई मानदंडों में ढील दी है। इसके तहत रक्षा क्षेत्र में 74 प्रतिशत तक और दूरसंचार, बीमा व अंतरिक्ष क्षेत्रों में 100 प्रतिशत तक विदेशी निवेश की अनुमति दी गई है।
इन सुधारात्मक नीतियों का ही परिणाम है कि साल 2014 से 2025 के बीच भारत में 748 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक का रिकॉर्ड एफडीआई प्राप्त हुआ है। भारत में निवेश करने वाले देशों की संख्या भी 89 से बढ़कर 112 हो गई है। नई दिल्ली में रोजगार मेले को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने रेखांकित किया कि आज 100 से अधिक देश एफडीआई के जरिए भारत में निवेश कर रहे हैं।
मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंथ नागेश्वरन के अनुसार, भारत ने अंतरिक्ष, ड्रोन, रक्षा और बीमा सहित कई प्रमुख क्षेत्रों को विदेशी निवेश के लिए खोला है। यह एफडीआई नीति सुधार निवेशकों के अनुकूल माहौल बनाने, निवेश प्रक्रियाओं को सरल बनाने और भारत को एक पसंदीदा वैश्विक निवेश गंतव्य के रूप में मजबूत करने के प्रयासों को दर्शाते हैं।
