उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह आज हरिद्वार में प्रेस क्लब द्वारा आयोजित ‘हिंदी पत्रकारिता द्वि-शताब्दी समारोह’ में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने हिंदी पत्रकारिता के ऐतिहासिक, सामाजिक और लोकतांत्रिक योगदान पर विस्तार से अपने विचार व्यक्त किए।
राज्यपाल ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता का 200 वर्षों तक लगातार सक्रिय बने रहना उसकी गहराई, समर्पण और समाज के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि ‘उदन्त मार्तण्ड’ के प्रकाशन से शुरू हुई हिंदी पत्रकारिता की यात्रा ने देश में राष्ट्र चेतना को जागृत करने में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने हिंदी को केवल संवाद का माध्यम नहीं बल्कि भारत की भावनाओं, संस्कृति और आत्मा की सशक्त अभिव्यक्ति बताया।
राज्यपाल गुरमीत सिंह ने कहा कि भारत की स्वतंत्रता केवल सत्ता परिवर्तन तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह भारतीय सभ्यता के पुनर्जागरण और एक नए भारत के निर्माण का संकल्प था। इस राष्ट्रीय संकल्प को आगे बढ़ाने में हिंदी पत्रकारिता ने हमेशा महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और समाज को सही दिशा देने का कार्य किया है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में डिजिटल युग के कारण मीडिया का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। तकनीक के बढ़ते प्रभाव से पत्रकारिता के तरीके और माध्यम भले ही बदल रहे हों, लेकिन पत्रकारिता का मूल धर्म और उसकी जिम्मेदारी हमेशा समान रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सत्य, निष्पक्षता और समाज के प्रति जवाबदेही पत्रकारिता की सबसे बड़ी ताकत है।
