अप्रैल के महीने में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) का भारतीय शेयर बाजार के प्रति रुख काफी नकारात्मक रहा है, जिसके चलते उन्होंने भारतीय बाजारों से भारी पूंजी निकालने का सिलसिला जारी रखा है। डिपॉजिटरी के आंकड़ों पर नजर डालें तो विदेशी निवेशकों ने अप्रैल महीने में अब तक भारतीय इक्विटी बाजारों से 43 हजार 967 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर बेचे हैं। इस बड़े स्तर की बिकवाली का दबाव भारतीय बाजार पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है और यह निवेशकों की चिंता का एक बड़ा कारण बन गया है।
इस सप्ताह के दौरान विदेशी निवेशकों के व्यापारिक पैटर्न में एक नाटकीय उलटफेर देखने को मिला है। सप्ताह की शुरुआत में पहले तीन कारोबारी सत्रों के दौरान विदेशी निवेशक शेयरों की जमकर खरीदारी करते हुए शुद्ध खरीदार के रूप में बने हुए थे, लेकिन सप्ताह के अंतिम दिनों में उन्होंने अचानक अपना रुख पूरी तरह बदल लिया और वे बिकवाली के मोड में आ गए। इस बदलाव के कारण बाजार की धारणा पर विपरीत असर पड़ा और पूरे सप्ताह का रुख नकारात्मक क्षेत्र में चला गया।
बाजार में बिकवाली का दबाव शुक्रवार के दिन अपने चरम पर पहुंच गया। आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार को विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने लगभग 2 हजार 470 करोड़ रुपये की शुद्ध इक्विटी बिकवाली दर्ज की, जो इस पूरे सप्ताह में किसी एक दिन में हुई सबसे बड़ी बिकवाली का आंकड़ा है। इससे पहले गुरुवार को भी बाजार में लगभग 1 हजार 250 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी हुई थी, जिसने बाजार के रुझान को और अधिक कमजोर कर दिया।
केवल शेयर बाजार ही नहीं, बल्कि डेट मार्केट यानी ऋण बाजार से भी विदेशी निवेशकों ने अपना पैसा तेजी से निकाला है। डिपॉजिटरी डेटा के मुताबिक, FPIs ने भारतीय डेट मार्केट से 7 हजार 972 करोड़ रुपये की पूंजी बाहर निकाली है। यदि इन सभी आंकड़ों को समग्र रूप से देखा जाए, तो अप्रैल महीने के इस दौर में भारतीय पूंजी बाजार से कुल शुद्ध निकासी का आंकड़ा 56 हजार 940 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो दर्शाता है कि विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से अपना विश्वास कम करते हुए बड़ी मात्रा में नकदी निकाली है।
