स्वीडन की लुंड यूनिवर्सिटी द्वारा किए गए एक व्यापक शोध में यह बात सामने आई है कि वयस्कता के शुरुआती दौर यानी जवानी में वजन बढ़ना भविष्य के स्वास्थ्य के लिए सबसे अधिक जोखिम भरा हो सकता है। 6,00,000 से अधिक व्यक्तियों पर किए गए इस अध्ययन में 17 से 60 वर्ष की आयु के बीच वजन में होने वाले बदलावों और विभिन्न बीमारियों से होने वाली मृत्यु दर के बीच के संबंधों की जांच की गई। शोधकर्ताओं ने पाया कि वयस्कता के शुरुआती वर्षों में वजन बढ़ना दीर्घकालिक स्वास्थ्य पर सबसे गहरा प्रभाव डालता है। आमतौर पर मोटापे को कई बीमारियों का कारण माना जाता है, लेकिन इस शोध ने किसी एक समय के मोटापे के बजाय पूरे वयस्क जीवन के दौरान वजन में होने वाले उतार-चढ़ाव पर ध्यान केंद्रित किया। लुंड यूनिवर्सिटी में महामारी विज्ञान की एसोसिएट प्रोफेसर तंजा स्टॉक्स का कहना है कि सबसे सुसंगत निष्कर्ष यह है कि कम उम्र में वजन बढ़ना उन लोगों की तुलना में असामयिक मृत्यु के उच्च जोखिम से जुड़ा है जिनका वजन स्थिर रहता है।
शोध के आंकड़ों के अनुसार, 17 से 60 वर्ष की आयु के बीच पुरुषों और महिलाओं दोनों के वजन में प्रति वर्ष औसतन 0.4 किलोग्राम की वृद्धि देखी गई। विश्लेषण से पता चला कि जिन व्यक्तियों का वजन वयस्कता के दौरान तेजी से बढ़ा, उन्हें मोटापे से जुड़ी बीमारियों से मरने का अधिक खतरा था। विशेष रूप से 17 से 29 वर्ष की आयु के बीच मोटापे का शिकार होने वाले लोगों में उन लोगों की तुलना में समय से पहले मृत्यु का जोखिम लगभग 70 प्रतिशत अधिक पाया गया जो 60 वर्ष की आयु तक मोटापे का शिकार नहीं हुए थे। शोधकर्ता हुयेन ले के अनुसार, कम उम्र में मोटापे की शुरुआत का मतलब है कि शरीर लंबे समय तक अतिरिक्त वजन के जैविक प्रभावों के संपर्क में रहता है, जो अंगों और प्रणालियों के लिए अधिक हानिकारक होता है।
इस शोध में महिलाओं के मामले में कैंसर के जोखिम को लेकर एक अपवाद भी देखा गया। परिणामों से पता चला कि महिलाओं में कैंसर का जोखिम इस बात पर निर्भर नहीं करता कि उनका वजन किस उम्र में बढ़ा। यानी शुरुआती उम्र में वजन बढ़ना या बाद की उम्र में वजन बढ़ना, दोनों ही स्थितियों में कैंसर का खतरा लगभग समान था। शोधकर्ताओं का मानना है कि इसके पीछे रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज) के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलाव जैसे अन्य जैविक तंत्र जिम्मेदार हो सकते हैं। अध्ययन की एक बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें वजन के पुराने आंकड़ों के लिए लोगों की याददाश्त पर भरोसा करने के बजाय स्वास्थ्य सेवा केंद्रों और सैन्य भर्ती जैसे आधिकारिक रिकॉर्ड्स का उपयोग किया गया, जिससे परिणाम अधिक विश्वसनीय और सटीक रहे।
डॉक्टरों और विशेषज्ञों का मानना है कि यह अध्ययन नीति निर्माताओं के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है। आज के “ओबेसोजेनिक समाज” में, जहाँ अस्वास्थ्यकर खान-पान और शारीरिक सक्रियता की कमी आम है, मोटापे को रोकना व्यक्तिगत प्रयास के साथ-साथ राजनीतिक इच्छाशक्ति का भी विषय है। शोध यह स्पष्ट करता है कि मोटापे से निपटने के प्रभावी उपाय न केवल लोगों के जीवन की गुणवत्ता सुधारेंगे बल्कि समय से पहले होने वाली मौतों को भी कम करेंगे। मोटापे से जुड़ी बीमारियों में हृदय रोग, टाइप 2 मधुमेह, उच्च रक्तचाप, फैटी लिवर और विभिन्न प्रकार के कैंसर (जैसे कोलन और स्तन कैंसर) शामिल हैं, जिनसे बचाव के लिए जवानी से ही वजन पर नियंत्रण रखना अनिवार्य है।
अध्ययन के स्रोत और आधिकारिक विवरण (Study Sources)
- प्रमुख शोध संस्थान: यह अध्ययन स्वीडन की प्रतिष्ठित लुंड यूनिवर्सिटी (Lund University) के शोधकर्ताओं द्वारा संचालित किया गया है।
- वैज्ञानिक जर्नल: इस शोध के निष्कर्ष प्रसिद्ध मेडिकल जर्नल ‘ई-क्लीनिकल मेडिसिन’ (eClinicalMedicine) में प्रकाशित हुए हैं, जो ‘द लैंसेट’ (The Lancet) परिवार का हिस्सा है।
- अध्ययन का शीर्षक: “Weight trajectories and obesity onset between 17 and 60 years of age, and cause-specific mortality: the Obesity and Disease Development Sweden (ODDS) pooled cohort study” (2026)।
- डेटा का आधार: यह शोध ‘ODDS’ (Obesity and Disease Development Sweden) नामक एक विशाल डेटा पूल पर आधारित है, जिसमें स्वीडन के कई दशकों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड्स को एकीकृत किया गया है।
(स्रोत: लुंड यूनिवर्सिटी)
Disclaimer:- यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार के विकल्प के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। स्वास्थ्य संबंधी किसी भी समस्या या आहार/जीवनशैली में बदलाव करने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लें। इस लेख में दी गई जानकारी स्वीडन की लुंड यूनिवर्सिटी द्वारा प्रकाशित शोध पर आधारित है, जिसका उद्देश्य वैज्ञानिक जागरूकता फैलाना है। संबंधित डेटा और निष्कर्षों की व्याख्या व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थितियों के आधार पर भिन्न हो सकती है।
