चंडीगढ़ स्थित पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER) के 63वें स्थापना दिवस समारोह में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के कुलपति अजीत कुमार चतुर्वेदी ने ‘AI in Healthcare’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) डॉक्टरों का विकल्प बनने के बजाय उनकी कार्यक्षमता, निर्णय क्षमता और शोध को बेहतर बनाने में सहायक सिद्ध होगा।
व्याख्यान के मुख्य बिंदु:
- डॉक्टरों की मदद: AI डॉक्टरों की जगह नहीं लेगा, बल्कि मेडिकल रिकॉर्ड, पैथोलॉजी रिपोर्ट और शोध से तेजी से डेटा प्रोसेस कर उनकी विशेषज्ञता का दायरा बढ़ाएगा।
- भारतीय परिप्रेक्ष्य में AI: भारत को केवल AI का उपभोक्ता बनने के बजाय भारतीय मरीजों और बीमारियों के पैटर्न के अनुरूप अपने AI समाधान विकसित करने होंगे। पश्चिमी डेटा पर आधारित AI भारत के लिए पूरी तरह सटीक नहीं हो सकता।
- हेल्थकेयर में अनुप्रयोग: AI रिमोट हेल्थकेयर, रेडियोलॉजी, अस्पताल प्रबंधन और साक्ष्य-आधारित निर्णयों में क्रांति ला रहा है, हालांकि जटिल सर्जरी में इसका इस्तेमाल अभी विकास के चरण में है।
- मेडिकल शिक्षा का भविष्य: AI के दौर में मेडिकल छात्रों को रटने के स्थान पर क्लीनिकल जजमेंट, आलोचनात्मक सोच और मरीजों से संवाद पर अधिक ध्यान केंद्रित करना होगा।
PGIMER में सुविधाओं का विस्तार:
समारोह के दौरान PGIMER के निदेशक विवेक लाल ने संस्थान की उपलब्धियों की जानकारी दी:
- बेड्स की संख्या में बढ़ोतरी: एडवांस्ड मदर एंड चाइल्ड सेंटर और एडवांस्ड न्यूरोसाइंस सेंटर के उद्घाटन के बाद बेड्स की संख्या 2,200 से बढ़कर 3,000 हो गई है।
- सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं: आयुष्मान भारत योजना और अमृत फार्मेसी के जरिए मरीजों को किफायती और जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
