मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता करते मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय। (फोटो क्रेडिट: CGDPR)
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कैबिनेट की बैठक में राज्य के विकास और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई ऐतिहासिक फैसले लिए गए। साय सरकार ने इस बैठक में औद्योगिक निवेश को तेज करने, टैक्स प्रणालियों को सरल बनाने और उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने से जुड़े कई महत्वपूर्ण विधेयकों के प्रारूप को हरी झंडी दी है। इस बैठक का सबसे बड़ा फैसला छत्तीसगढ़ को देश का पहला ऐसा राज्य बनाना है, जो व्यापार और उद्योग स्थापित करने के लिए एक समर्पित ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ विधेयक लागू करने जा रहा है।
मुख्य समाचार: व्यापार और उद्योग जगत में बड़े बदलाव
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में कैबिनेट ने राज्य की आर्थिक और प्रशासनिक व्यवस्था में बड़े बदलावों को मंजूरी दी है। इन फैसलों का सीधा उद्देश्य लालफीताशाही (ब्यूरोक्रेसी की देरी) को खत्म करना और निवेशकों के लिए राह आसान करना है।
1. देश का पहला ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ विधेयक मंजूर
कैबिनेट ने छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (विनिमय-मुक्ति एवं सुविधा) विधेयक, 2026 के प्रारूप को मंजूरी दे दी है। इस तरह का कानून लाने वाला छत्तीसगढ़ पूरे देश का पहला राज्य बनेगा।
- क्या हैं खास प्रावधान: इस विधेयक के तहत डीम्ड परमिशन (मान्यता प्राप्त अनुमति), स्व-प्रमाणीकरण (Self-certification), तृतीय-पक्ष सत्यापन (Third-party Verification), और जोखिम-आधारित निरीक्षण (Risk-based Inspection) जैसी आधुनिक व्यवस्थाएं लागू की जाएंगी।
- दोहरे लाइसेंस से मुक्ति: नए उद्योगों को अब दोहरे लाइसेंसिंग के चक्कर से मुक्ति मिलेगी। इससे कागजी कार्रवाई में लगने वाला समय बचेगा, व्यापार करना बेहद आसान होगा और राज्य में बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
2. वाणिज्यिक कर अधिकरण समाप्त, राजस्व मंडल को ट्रांसफर होंगे मामले
माल एवं सेवा कर (GST) लागू होने के बाद से वैट (VAT) से जुड़े पुराने मामलों और द्वितीय अपीलों में भारी कमी आई है। इसे देखते हुए कैबिनेट ने छत्तीसगढ़ मूल्य संवर्धित कर (संशोधन) विधेयक, 2026 को मंजूरी दी है।
- फैसला: अब राज्य में अलग से वाणिज्यिक कर अधिकरण (Commercial Tax Tribunal) की आवश्यकता नहीं रह गई है, क्योंकि राज्य में पहले से ही जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण (GSTAT) काम कर रहा है। इसलिए इस अधिकरण को समाप्त करने का निर्णय लिया गया है।
- असर: अधिकरण में जितने भी पुराने मामले लंबित हैं, उन्हें अब राजस्व मंडल (Rajasva Mandal) में ट्रांसफर कर दिया जाएगा, जिससे अपीलों के निपटारे की प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित और तेज हो सके।
3. उद्योगों को तेजी से रिफंड और नए निवेश को प्रोत्साहन
व्यापारियों और निर्यातकों को बड़ी राहत देते हुए छत्तीसगढ़ माल एवं सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2026 के प्रारूप को मंजूरी दी गई। इसका मुख्य उद्देश्य करदाताओं, विशेषकर निर्यातकों और इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर (जहां इनपुट पर टैक्स ज्यादा और आउटपुट पर कम हो) वाले उद्योगों के लिए रिफंड की प्रक्रिया को पारदर्शी और तेज बनाना है।
इसके साथ ही, छत्तीसगढ़ औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन (संशोधन) विधेयक, 2026 को भी मंजूरी दी गई है। इसे देश के अन्य अग्रणी औद्योगिक राज्यों की नीतियों का अध्ययन करने के बाद तैयार किया गया है, ताकि छत्तीसगढ़ में निवेश की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाया जा सके।
नीतिगत फैसले: बिजली, रियल एस्टेट और शिक्षा में सुधार
औद्योगिक सुधारों के अलावा, साय कैबिनेट ने आम जनता, छात्रों, मकान मालिकों और पर्यावरण से जुड़े कई और अहम फैसले लिए हैं।
बिजली भुगतान सुरक्षा के लिए नई आरबीआई व्यवस्था
छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी द्वारा केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के विद्युत उपक्रमों (CPSUs) जैसे एनटीपीसी (NTPC) से खरीदी जाने वाली बिजली के भुगतान को सुरक्षित करने के लिए पुराना त्रिपक्षीय अनुबंध बदला जाएगा। अब इसकी जगह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के अनुसार डायरेक्ट डेबिट मैंडेट (DDM) व्यवस्था लागू होगी। इससे राज्य को बिना किसी अतिरिक्त वित्तीय भार के लगातार बिजली की आपूर्ति मिलती रहेगी।
निजी विश्वविद्यालयों के लिए कड़े नियम: शिक्षा की गुणवत्ता पर जोर
कैबिनेट ने छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) (संशोधन) विधेयक, 2026 के प्रारूप का अनुमोदन किया है। भारत सरकार के मंत्रिमंडल सचिवालय की सिफारिशों पर आधारित इस संशोधन के तहत अब निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के लिए विन्यास निधि की जगह रक्षित निधि (Reserve Fund) का प्रावधान होगा। इससे यूनिवर्सिटीज को यूजीसी (UGC) के मानकों के अनुसार बेहतर लाइब्रेरी, इन्फ्रास्ट्रक्चर और लैब की सुविधाएं सुनिश्चित करनी होंगी, जिससे छात्रों का भविष्य सुरक्षित होगा।
पानी प्रदूषण से जुड़े छोटे उल्लंघन अब अपराध नहीं
केंद्र सरकार के नियमों को अपनाते हुए कैबिनेट ने जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) संशोधन अधिनियम, 2024 को राज्य में लागू करने के लिए विधानसभा में संकल्प प्रस्तुत करने की मंजूरी दी है। इसके तहत पर्यावरण नियमों के छोटे-मोटे उल्लंघनों को अपराध (Criminal Offense) की श्रेणी से हटाकर केवल आर्थिक दंड (Financial Penalty) का प्रावधान किया गया है, जिससे उद्योगों को राहत मिलेगी और पर्यावरण संरक्षण भी प्रभावी ढंग से होगा।
रियल एस्टेट और किरायेदारों को राहत
- नवा रायपुर ओटीएस योजना-2026: नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण (NRDA) द्वारा आवंटित भूखंडों और भवनों के बकाया ब्याज और अधिभार (Surcharge) में राहत देने के लिए ‘वन टाइम सेटलमेंट’ (OTS) योजना को मंजूरी दी गई है। इससे सालों से अटकी परियोजनाएं समय पर पूरी हो सकेंगी और कानूनी मुकदमों में कमी आएगी।
- भाड़ा नियंत्रण (Rent Control) संशोधन: खाली पड़े मकानों को किराये पर देने की प्रवृत्ति को बढ़ावा देने और मकान मालिक-किरायेदार के विवादों को जल्द सुलझाने के लिए छत्तीसगढ़ भाड़ा नियंत्रण अधिनियम (संशोधन) विधेयक, 2026 को मंजूरी दी गई। यह भारत सरकार के ‘आदर्श किरायेदारी अधिनियम, 2021’ पर आधारित है।
अन्य महत्वपूर्ण निर्णय
कैबिनेट ने छत्तीसगढ़ पुलिस के विशेष कार्यपालिक बल (बस्तर फाइटर्स) की भर्ती तथा सेवा शर्तों के नियमों (2026) में जरूरी संशोधन को मंजूरी दी है। इसके साथ ही, राजनांदगांव में सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए 2000 सीटों की क्षमता वाले एक आधुनिक ऑडिटोरियम के निर्माण हेतु सरकारी जमीन आवंटित करने का बड़ा फैसला लिया गया है।
यह निर्णय क्यों महत्वपूर्ण है: संपादकीय विश्लेषण
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की कैबिनेट का यह विधायी कदम छत्तीसगढ़ को महज एक खनिज-आधारित राज्य से बदलकर एक आधुनिक, उद्योग-अनुकूल राज्य बनाने की दिशा में बड़ा मोड़ है। ‘डीम्ड परमिशन’ और ‘सेल्फ-सर्टिफिकेशन’ को कानूनी रूप देकर छत्तीसगढ़ ने खुद को गुजरात, महाराष्ट्र और तेलंगाना जैसे बड़े औद्योगिक राज्यों की कतार में ला खड़ा किया है।
वाणिज्यिक कर अधिकरण को समाप्त करना और बिजली खरीद के लिए आरबीआई-सम्मत डायरेक्ट डेबिट मैंडेट को अपनाना यह दिखाता है कि सरकार पुरानी और पेचीदा प्रशासनिक व्यवस्थाओं को खत्म करने के लिए गंभीर है। वहीं, किरायेदारी कानून में बदलाव और निजी विश्वविद्यालयों पर नकेल कसने वाले कदम सीधे तौर पर आम नागरिकों और छात्रों को सुरक्षा प्रदान करेंगे। यह केवल एक सामान्य कैबिनेट बैठक नहीं थी, बल्कि यह छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक ढांचे को नए सिरे से रीबूट करने की नीति है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
अपनी स्थापना के बाद से ही छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कोयला, लोहा, सीमेंट और बिजली जैसे भारी उद्योगों पर निर्भर रही है। हालांकि, तकनीकी और विविध क्षेत्रों के निवेशकों को आकर्षित करने में राज्य को हमेशा जटिल कानूनी प्रक्रियाओं और पुराने टैक्स विवादों का सामना करना पड़ता था।
साल 2017 में देश भर में जीएसटी लागू होने के बाद से राज्यों के पुराने वाणिज्यिक कर अधिकरणों की प्रासंगिकता धीरे-धीरे कम होती गई, जिसकी तार्किक परिणति आज इस अधिकरण के खात्मे के रूप में दिखाई दी है। इसके अलावा, केंद्र सरकार की ‘आदर्श किरायेदारी नीति’ और राष्ट्रीय स्तर पर ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ की रैंकिंग में सुधार की होड़ ने छत्तीसगढ़ को दशकों पुराने कानूनों को बदलने और उन्हें आज के आर्थिक दौर के अनुरूप ढालने के लिए प्रेरित किया है।
