दीपावली के पांच दिवसीय महापर्व की शुरुआत धनतेरस यानी धनत्रयोदशी के पावन पर्व के साथ होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अपने हाथों में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसलिए इस दिन आरोग्य के देवता भगवान धन्वंतरि, धन के देवता कुबेर और माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष विधान है।
धनतेरस पूजा और शुभ मुहूर्त (6 नवंबर, 2026)
- त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 6 नवंबर को सुबह 10:30 बजे से
- त्रयोदशी तिथि समाप्त: 7 नवंबर को सुबह 10:47 बजे तक
- धनतेरस पूजा मुहूर्त: शाम 6:02 बजे से शाम 7:57 बजे तक (अवधि: 1 घंटा 56 मिनट)
- प्रदोष काल: शाम 5:33 बजे से रात 8:09 बजे तक
- वृषभ काल: शाम 6:02 बजे से शाम 7:57 बजे तक
- यम दीपदान समय: शाम 5:32 बजे से शाम 6:51 बजे तक
धनतेरस पर खरीदारी का महत्व
धनतेरस के दिन नई वस्तुएं खरीदना बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन लोग अपनी सामर्थ्य के अनुसार सोना, चांदी, बर्तन और नए आभूषण खरीदते हैं। मान्यता है कि इस दिन जिस वस्तु की भी खरीदारी की जाती है, उसमें 13 गुना वृद्धि होती है। इसके अलावा झाड़ू खरीदना भी बहुत शुभ माना जाता है, जिसे मां लक्ष्मी का प्रतीक कहा गया है।
पूजा का महत्व और परंपरा
- आरोग्य और समृद्धि: इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा करने से उत्तम स्वास्थ्य और लंबी आयु का आशीर्वाद मिलता है।
- यम दीपदान: धनतेरस की शाम को घर के मुख्य द्वार पर यमराज के नाम का दीपक (यम दीप) जलाने की परंपरा है, जिससे अकाल मृत्यु का भय दूर होता है।
यह पर्व न केवल सुख-समृद्धि का प्रतीक है, बल्कि जीवन में सकारात्मकता और अच्छे स्वास्थ्य का संदेश भी देता है।
