हाल ही में ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, जापान और नॉर्डिक देशों सहित दुनिया के 33 से अधिक देशों ने अपने नागरिकों के लिए आपातकालीन दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सरकारों ने लोगों से अपने घरों में कम से कम 3 से 7 दिनों का सूखा राशन, पीने का पानी, जरूरी दवाएं, टॉर्च और कुछ नकदी स्टॉक करके रखने को कहा है। इन चेतावनियों के बाद दुनिया भर में यह सवाल उठ रहा है कि क्या दुनिया किसी बड़े संकट या तीसरे विश्व युद्ध की ओर बढ़ रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह किसी आसन्न महाविनाश या विश्व युद्ध की भविष्यवाणी नहीं है, बल्कि दुनिया इस समय ‘पॉलीक्राइसिस’ यानी एक साथ कई संकटों से गुजर रही है। इसके मुख्य कारणों में साइबर हमले और डिजिटल ब्लैकआउट का खतरा, रूस-यूक्रेन व मध्य पूर्व के तनाव के कारण सप्लाई चेन का टूटना, और मौसम में अचानक होने वाले चरम बदलाव शामिल हैं।
वैश्विक मंदी और अर्थव्यवस्था का हाल: अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुसार, इस साल वैश्विक विकास दर 3.1% रहने का अनुमान है, जिसका मतलब है कि पूरी दुनिया आधिकारिक तौर पर मंदी में नहीं जा रही है। हालांकि, अमेरिका और यूरोप में महंगाई और ऊंची ब्याज दरें बनी हुई हैं, चीन का प्रॉपर्टी सेक्टर संकट में है और पश्चिम एशिया के तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें लगातार अस्थिर हैं।
भारत पर इसका क्या असर होगा? ग्लोबल रेटिंग एजेंसियों और IMF की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में मंदी के डर के बीच भारत लगभग 7% की अनुमानित जीडीपी के साथ दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है। भारत की मजबूत घरेलू मांग, विशाल उपभोक्ता बाजार, भारी विदेशी मुद्रा भंडार, खाद्य सुरक्षा और यूपीआई (UPI) जैसी मजबूत डिजिटल भुगतान प्रणालियां इसे वैश्विक संकटों से बचाती हैं।
हालांकि, भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार ने चेतावनी दी है कि वैश्विक सप्लाई संकट और कच्चे तेल की कीमतों (चूंकि भारत अपनी जरूरत का 80% से अधिक तेल आयात करता है) के कारण सतर्क रहने की जरूरत है। यदि अमेरिका या यूरोप में सुस्ती आती है, तो भारत के आईटी और निर्यात क्षेत्र पर भी थोड़ा असर पड़ सकता है।
कुल मिलाकर, विकसित देशों द्वारा दिए जा रहे ये निर्देश किसी प्रलय की तैयारी नहीं, बल्कि नागरिकों को किसी भी अप्रत्याशित साइबर हमले या आपदा से निपटने के लिए जागरूक और आत्मनिर्भर बनाने के उपाय हैं। आर्थिक मोर्चे पर भारत एक मजबूत किले की तरह सुरक्षित है, इसलिए डरने की नहीं बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक की तरह सूझबूझ दिखाने की जरूरत है।
