भारत और यूरोपीय यूनियन (ईयू) के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसे भारत के वैश्विक व्यापार इतिहास में एक महत्वपूर्ण और रणनीतिक मील का पत्थर बताया है। उन्होंने कहा कि यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी कूटनीति और वैश्विक नेतृत्व क्षमता का सशक्त प्रमाण है, जिसने भारत को विश्व मंच पर एक भरोसेमंद और प्रभावशाली साझेदार के रूप में स्थापित किया है।
गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने संदेश में कहा कि भारत–ईयू एफटीए पारस्परिक लाभ, संतुलित साझेदारी और दीर्घकालिक सहयोग पर आधारित है। उन्होंने इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद देते हुए देशवासियों को बधाई दी। अमित शाह ने कहा कि यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की आर्थिक मजबूती और रणनीतिक आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है।
उन्होंने कहा कि यह एफटीए ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को नई ऊर्जा देगा और भारतीय उद्योगों, किसानों, एमएसएमई और सेवा क्षेत्र को वैश्विक बाजारों तक बेहतर पहुंच प्रदान करेगा। इसके माध्यम से निवेश को बढ़ावा मिलेगा, रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और भारत की विनिर्माण एवं सेवा क्षमताओं को मजबूती मिलेगी।
गृह मंत्री ने यह भी कहा कि इस समझौते के जरिए भारत और यूरोपीय संघ खुले, पूर्वानुमान-आधारित और समावेशी विकास के लिए प्रतिबद्ध विश्वसनीय वैश्विक साझेदार के रूप में उभरेंगे। यह एफटीए वर्ष 2022 में वार्ता के पुनः आरंभ होने के बाद लंबे संवाद और गहन चर्चाओं के उपरांत संपन्न हुआ है, जो दोनों पक्षों की राजनीतिक इच्छाशक्ति और साझा दृष्टिकोण को दर्शाता है।
यूरोपीय संघ भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में शामिल है। हाल के वर्षों में दोनों के बीच वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और यूरोपीय संघ के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार लगभग 11.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जिसमें भारत का निर्यात और आयात दोनों ही मजबूत स्थिति में रहे।
सेवा क्षेत्र में भी भारत–ईयू साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। वर्ष 2024 में सेवा व्यापार 7.2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच बढ़ते विश्वास और सहयोग को दर्शाता है। भारत और यूरोपीय संघ क्रमशः दुनिया की चौथी और दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं और मिलकर वैश्विक व्यापार व सकल घरेलू उत्पाद का बड़ा हिस्सा प्रतिनिधित्व करते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत–ईयू एफटीए से वैश्विक अर्थव्यवस्था में स्थिरता आएगी और व्यापार, निवेश, तकनीक तथा नवाचार के क्षेत्र में अभूतपूर्व अवसर पैदा होंगे। यह समझौता भारत को एक मजबूत, आत्मनिर्भर और वैश्विक आर्थिक शक्ति के रूप में आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा।
