प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर भारत की स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय तनाव के बावजूद देश में ऊर्जा सुरक्षा को लेकर किसी प्रकार का संकट नहीं है। उन्होंने कहा कि पूरे देश में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य बनी हुई है और सरकार लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है।
प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत के पास 53 लाख मीट्रिक टन से अधिक रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार उपलब्ध है। इसके साथ ही 65 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त भंडारण क्षमता विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले ग्यारह वर्षों में देश की तेल शोधन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत आधार मिला है।
उन्होंने कहा कि सरकार विभिन्न देशों के आपूर्तिकर्ताओं के साथ लगातार संपर्क में है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि जहां-जहां से संभव हो, वहां से तेल और गैस की आपूर्ति निर्बाध रूप से जारी रहे। प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया में तीन सप्ताह से अधिक समय से जारी संघर्ष का वैश्विक अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है तथा पूरी दुनिया इस संकट के शीघ्र समाधान की अपेक्षा कर रही है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस गंभीर स्थिति में देश और विदेश में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। उन्होंने बताया कि संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक 3 लाख 75 हजार से अधिक भारतीय सुरक्षित स्वदेश लौट चुके हैं। साथ ही लगभग एक हजार भारतीय Iran से भी सुरक्षित वापस लाए गए हैं।
उन्होंने जानकारी दी कि प्रभावित लोगों की सहायता के लिए भारत तथा प्रभावित देशों में चौबीसों घंटे नियंत्रण कक्ष और आपातकालीन सहायता संपर्क केंद्र स्थापित किए गए हैं, ताकि तत्काल सूचना और सहायता उपलब्ध कराई जा सके। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार पूरी तरह संवेदनशील, सतर्क और हर आवश्यक सहायता देने के लिए तैयार है।
प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत अपनी रसोई गैस की लगभग 60 प्रतिशत आवश्यकता आयात के माध्यम से पूरी करता है। आपूर्ति में अनिश्चितता को देखते हुए सरकार ने घरेलू उपयोग के लिए रसोई गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ उसके उत्पादन को भी बढ़ाने पर काम किया है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक संकट का असर दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है, लेकिन भारत में इसके प्रभाव को न्यूनतम रखने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी उद्देश्य से केंद्र सरकार ने विभिन्न मंत्रालयों का एक संयुक्त समूह बनाया है, जो प्रतिदिन बैठक कर आयात-निर्यात से जुड़ी चुनौतियों की समीक्षा कर आवश्यक समाधान पर काम कर रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के किसानों ने खाद्यान्न भंडार को मजबूत बनाए रखा है और वर्तमान मौसम में बुआई को सुचारु रखने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि हाल के वर्षों में उर्वरकों की पर्याप्त व्यवस्था की गई है, ताकि वैश्विक संकट का बोझ किसानों पर न पड़े।
कूटनीतिक स्तर पर प्रधानमंत्री ने दोहराया कि भारत ने लगातार इस संघर्ष पर गहरी चिंता व्यक्त की है और सभी पक्षों से तनाव कम करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि संवाद और कूटनीति ही इस संकट का एकमात्र समाधान है और भारत शांतिपूर्ण समाधान के पक्ष में है।
प्रधानमंत्री ने नागरिक ढांचे, ऊर्जा प्रतिष्ठानों, परिवहन सुविधाओं तथा वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों को अस्वीकार्य बताया। उन्होंने कहा कि तटीय सुरक्षा, सीमा सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और रणनीतिक प्रतिष्ठानों सहित देश की सभी एजेंसियों को उच्च सतर्कता पर रखा गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध का वैश्विक प्रभाव कुछ समय तक बना रह सकता है, इसलिए भारत को पूरी तैयारी के साथ आगे बढ़ना होगा। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि जिस तरह देश ने महामारी के कठिन दौर का सफलतापूर्वक सामना किया था, उसी प्रकार इस चुनौती से भी मजबूती से बाहर निकलेगा।
