एसएंडपी ग्लोबल की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद भारत की आर्थिक वृद्धि दर वित्त वर्ष 2026-27 में 7.1 प्रतिशत पर स्थिर रहने की संभावना है। आर्थिक परिदृश्य पर आधारित इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपना स्थान बनाए रखेगा जिसे घरेलू मांग में मजबूती, निरंतर निर्यात और निजी निवेश में क्रमिक सुधार से बड़ा समर्थन मिल रहा है। रिपोर्ट में इस बात पर भी विशेष जोर दिया गया है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र की विकास दर वर्तमान चुनौतियों के बीच भी टिकी हुई है और अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के साथ मिलकर भारत इस क्षेत्र के विकास में एक मुख्य चालक के रूप में उभर रहा है।
चीन को छोड़कर पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि वर्ष 2026 तक सुधरकर 4.5 प्रतिशत होने की उम्मीद है जिसमें मजबूत घरेलू गतिविधियों और प्रौद्योगिकी से जुड़े क्षेत्रों के शानदार प्रदर्शन की अहम भूमिका होगी। महंगाई के मोर्चे पर भी राहत मिलने के संकेत हैं और ऊर्जा की कीमतों में वैश्विक उतार-चढ़ाव के बावजूद मुद्रास्फीति के घटकर लगभग 4.3 प्रतिशत तक आने का अनुमान लगाया गया है जो एक प्रबंधनीय सीमा के भीतर है। यह सकारात्मक आर्थिक दृष्टिकोण भारतीय बाजारों के प्रति निवेशकों के बढ़ते भरोसे और देश की आंतरिक आर्थिक मजबूती को दर्शाता है जो बाहरी झटकों को सहने में पूरी तरह सक्षम है।
