बिहार के कृषि मंत्री श्री राम कृपाल यादव ने पश्चिम एशिया के मौजूदा तनावपूर्ण हालातों और वैश्विक बाजार पर इसके संभावित असर को देखते हुए राज्य में उर्वरक की उपलब्धता एवं वितरण व्यवस्था की गहन समीक्षा की। एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान उन्होंने प्रदेश के सभी प्रमंडलों और जिला कृषि अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि किसानों को खाद की कमी किसी भी सूरत में नहीं होनी चाहिए। मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि राज्य सरकार किसानों की मेहनत और उनकी फसलों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता बर्दाश्त नहीं करेगी और जो भी उर्वरक की जमाखोरी, कालाबाजारी या निर्धारित मूल्य से अधिक पर बिक्री करेगा, उसके विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
प्रशासनिक स्तर पर उर्वरक की सुचारू आपूर्ति बनाए रखने के लिए मुख्यालय स्तर पर उड़नदस्ता दलों का गठन किया गया है जो जिलों में औचक निरीक्षण और छापेमारी कर रहे हैं। कृषि मंत्री ने संतुलित उर्वरक उपयोग और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रत्येक जिले में “धरती माता बचाओ निगरानी समिति” गठित करने का अभिनव निर्देश भी दिया है। अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं से सटे जिलों में खाद की तस्करी रोकने के लिए विशेष छापामारी दल सक्रिय कर दिए गए हैं ताकि बिहार के किसानों का हक सुरक्षित रहे। आंकड़ों के अनुसार 28 मार्च 2026 तक राज्य में यूरिया, डीएपी और एनपीके का पर्याप्त भंडार मौजूद है और पिछले एक साल में नियमों के उल्लंघन पर 116 प्रतिष्ठानों पर एफआईआर दर्ज करने के साथ ही 454 लाइसेंस रद्द किए जा चुके हैं।
मंत्री ने प्रखंडवार खाद के आवंटन को किसानों की वास्तविक आवश्यकता और खेती के क्षेत्रफल के आधार पर करने का निर्देश दिया है ताकि स्टॉक का मिलान पारदर्शी रहे। किसानों की सुविधा के लिए ‘बिहार कृषि मोबाइल ऐप’ के माध्यम से नजदीकी दुकानों पर खाद की उपलब्धता जांचने की सुविधा भी दी गई है। अपने संबोधन के अंत में कृषि मंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि किसान का हक छीनने वाला चाहे कितना भी प्रभावशाली व्यक्ति क्यों न हो, उसे कतई बख्शा नहीं जाएगा और पूरी सरकार मजबूती के साथ किसानों के पीछे खड़ी है।
