यूनाइटेड किंगडम (UK) के इस दौरे पर लगातार मिल रही निराशा के बाद आखिरकार भारतीय क्रिकेट फैंस के चेहरे पर मुस्कान लौटी है। बर्मिंघम के एजबेस्टन मैदान पर टीम इंडिया ने इतिहास रचते हुए इंग्लैंड को उसी के घर में 12 साल बाद पहली वनडे शिकस्त दी। टी20 फॉर्मेट में आयरलैंड और इंग्लैंड के हाथों क्लीन स्वीप झेलने और अपनी नंबर-1 रैंकिंग गंवाने के बाद, इस एक जीत ने भारतीय खेमे में नई जान फूंक दी है।
लेकिन यह जीत सिर्फ एक मैच के नतीजे तक सीमित नहीं है। यह मुकाबला इस बात का गवाह है कि कैसे सीनियर खिलाड़ियों की वापसी ने टीम का संतुलन बदला और कैसे यह सीरीज अगले साल होने वाले 50-ओवर वर्ल्ड कप के लिए एक टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है।
सीनियर कोर की वापसी: अनुभव का खेल
इस मुकाबले से पहले भारतीय टीम एक गहरे संकट में दिख रही थी। युवा ब्रिगेड इंग्लैंड की पिचों पर संघर्ष कर रही थी। लेकिन जैसे ही वनडे सीरीज के लिए शुभमन गिल, विराट कोहली, रोहित शर्मा, जसप्रीत बुमराह और लोकेश राहुल जैसे दिग्गजों ने टीम में कदम रखा, ड्रेसिंग रूम का माहौल पूरी तरह बदल गया। हालांकि रोहित और विराट सस्ते में आउट हुए, लेकिन उनकी मौजूदगी ने ही मैदान पर एक अलग मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया।
शुभमन गिल ने शानदार 80 रनों की पारी खेलकर यह साबित कर दिया कि क्यों उन्हें आधुनिक क्रिकेट का सबसे बेहतरीन बल्लेबाज माना जा रहा है। हालांकि, क्रैम्प्स (मांसपेशियों में खिंचाव) की वजह से उन्हें रिटायर्ड हर्ट होना पड़ा, लेकिन उन्होंने आश्वस्त किया है कि वे कार्डिफ में होने वाले अगले मैच के लिए उपलब्ध रहेंगे।
इस मुकाबले में एडजबेस्टन की पिच ने खेल के आगे बढ़ने के साथ अपना मिजाज बदला। कप्तान शुभमन गिल ने मैच के बाद एक बेहद महत्वपूर्ण रणनीतिक बात कही:
“शुरुआत में परिस्थितियां काफी हद तक दक्षिण अफ्रीका (जहां अगले साल 50-ओवर का विश्व कप होना है) जैसी थीं। गेंद अतिरिक्त उछाल ले रही थी और रन बनाना आसान नहीं था। हालांकि बाद में विकेट धीमा और स्थिर हो गया।”
इस पिच रिपोर्ट से साफ है कि भारतीय टीम प्रबंधन इस सीरीज का उपयोग अगले साल होने वाले मेगा इवेंट की तैयारियों के लिए कर रहा है। शुरुआती ओवरों में जब इंग्लैंड के गेंदबाजों को बाउंस मिल रहा था, तब भारतीय बल्लेबाजों ने रिस्क-फ्री (जोखिम रहित) क्रिकेट खेलने की रणनीति अपनाई।
ऑलराउंडर्स का दबदबा और क्रिकेट का अनोखा नियम
जब श्रेयस अय्यर और केएल राहुल के विकेट गिरने के बाद भारत एक समय मुश्किल में दिख रहा था, तब वाशिंगटन सुंदर और अक्षर पटेल की 102 रनों की नाबाद साझेदारी ने मैच का पासा पलट दिया। अक्षर पटेल ने न सिर्फ 57 रनों की नाबाद पारी खेली, बल्कि गेंदबाजी में इंग्लैंड के आखिरी 4 विकेट चटकाकर ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ का खिताब जीता। वह 2022 में हार्दिक पांड्या के बाद एक वनडे मैच में 50 रन और 4 विकेट लेने वाले छठे भारतीय पुरुष क्रिकेटर बन गए हैं।
इस साझेदारी के दौरान क्रिकेट नियमों (MCC Laws of Cricket) का एक दिलचस्प नजारा भी देखने को मिला। वाशिंगटन सुंदर जब 28 रन पर खेल रहे थे, तब गेंद उनके पैड और जूते से टकराकर सीधे स्टंप्स पर जा लगी। गेंद की गति इतनी थी कि वह विकेट से टकराई, लेकिन बेल्स (गुल्लियां) अपनी जगह से नहीं हिलीं। आईसीसी के नियम 29.1 के तहत, बल्लेबाज को तब तक आउट नहीं माना जा सकता जब तक कि कम से कम एक बेल पूरी तरह से स्टंप के ऊपर से न गिर जाए। सुंदर को मिले इस जीवनदान ने इंग्लैंड की बची-कुची उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
भारतीय टीम ने तीन मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली है। अब अगला पड़ाव कार्डिफ का सोफिया गार्डन्स स्टेडियम है। कार्डिफ की पिचें आमतौर पर स्पिनरों को थोड़ी मदद देती हैं, जो अक्षर पटेल और वाशिंगटन सुंदर की फॉर्म को देखते हुए भारत के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट हो सकता है।
